
लखनऊ यूनिवर्सिटी नहीं भर पा रहा MBA की सीटें
लखनऊ. कुछ साल पहले तक लखनऊ यूनिवर्सिटी के एमबीए कोर्स में एडमिशन लेने दूर-दूर से छात्र आते थे लेकिन इस बार एलयू को इस कोर्स की सीटें भरना भी मुश्किल लग रहा है। इस सत्र में आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों को बुलाने के बाद भी महज 430 दाखिले ही हुए जबकि सीटें 600 से अधिक हैं। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास सीटों को भरने के लिए कोई विकल्प ही नहीं बचा है। यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट की पढ़ाई की शुरुआत 1956 में हुई थी। तब यहां एमकॉम बिजनस एडमिनिस्ट्रेशन पढ़ाया जाता था।
नहीं आए ज्यादा आवेदन
लखनऊ यूनिवर्सिटी पहले कैट के माध्यम से ही सीटें भरता था लेकिन पिछले एक दशक से यूनिवर्सिटी अपना एंट्रेंस करवाकर सीटें भर रहा है। इस साल दोबारा से सिर्फ कैट से दाखिले लेने का निर्णय लिया गया। लेकिन हालत ये रही कि छह महीने फॉर्म भरवाने के बाद भी दस प्रतिशत सीटों के बराबर भी आवेदन नहीं आए। ऐसे में एलयू ने फिर से एंट्रेंस कराने का निर्णय लिया और बिना कैट वालों को भी आवेदन का मौका दिया। इसके बावजूद सीटें नहीं भर पा रही हैं।
ज्यादा फीस भी है कारण
मैनेजमेंट कोर्सों की फीस 87 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर है जो पूरे कोर्स में साढ़े तीन लाख होती है। जबकि ओल्ड कैंपस रेगुलर में सिर्फ 50 हजार है। ऐसे में यहीं के छात्रों का कहना है कि फीस के मुकाबले न तो यहां उस स्तर के शिक्षक हैं न ही प्लेसमेंट। इसके विपरीत इसके समान फीस वाले अन्य निजी संस्थान इससे कहीं अच्छी फैकल्टी से पढ़ाई कराकर मल्टी नैशनल कंपनी में प्लेसमेंट तक करा रहे हैं।
पहले भी कई कोर्स शुरू होकर हुए बंद
एमबीए की फीस के कारण भी छात्रों की रुचि कम हुई है। मैनेजमेंट स्टीज़ विभाग ने साल 1993 में एमबीए एनआरआई शुरू किया जो सेल्फफाइनैंस था ज्यादा फीस ली गई, गेस्ट लेक्चरर रखे गए। दूसरे विभागों ने भी सेल्फफाइनैंस के मैनेजमेंट कोर्स शुरू किए। साल 1998 में विवि ने मैनेजमेंट के सभी कोर्स एक जगह कर इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज बना दिया। यहां एमबीए के सभी कोर्स सेल्फफाइनेंस में शुरू किए गए। वहीं, मैनेजमेंट मूल विभाग में एमबीए का सामान्य कोर्स चलता रहा। इसमें महज 60 रेगुलर और 60 सेल्फफाइनेंस सीटें आज भी हैं, लेकिन आईएमएस में सेल्फफाइनैंस के कारण के यहां नियमित शिक्षक नहीं रखे जा सके। इसी कारण दाखिले कम होने लगे।
Updated on:
17 Jul 2018 05:42 pm
Published on:
17 Jul 2018 03:38 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
