19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दूध बेचकर जमा करता था फीस, राजनाथ पहनाएंगे गोल्ड मेडल

लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्ड दूध बेचकर जमा करता था फीस, राजनाथ पहनाएंगे गोल्ड मेडल

2 min read
Google source verification
lu topper

लखनऊ.क हते हैं कि भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं। ऐसी ही कहानी है लखनऊ यूनिवर्सिटी के टॉपर कोमल त्रिपाठी की जिन्हें देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह डॉ. चक्रवर्ती गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगे। रायबरेली के पचखरा गांव के रहने वाले कोमल एमए थर्ड ईयर के स्टूडेंट हैं। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों भरा रहा है। वह दूध बेचकर स्कूल की फीस भरा करते थे। बता दें कि एलयू के दीक्षांत समारोह में गृहमंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि होंगे।

पिता हैं किसान,कठिनाइयों में बीता बचपन

कोमल ने बताया कि उनके पिता प्रेम नारायण त्रिपाठी (48) किसान हैं और मां सुधा हाउस वाइफ है। घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। पिता आलू की खेती करते थे। बाबा स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें 3000 रुपए पेंशन मिलती थी, जिससे घर खर्च चलता था। उनकी डेथ हो चुकी है। कोमल के मुताबिक, "मेरी प्राइमरी स्कूलिंग गांव में ही हुई है। कई बार स्कूल की फीस भरने तक के लिए पैसे नहीं होते थे। हमारे घर पर एक ही गाय थी। उसका दूध कभी घर के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ, क्योंकि दूध बेचकर ही हमारे स्कूल की फीस आती थी।"

लालटेन की रोशनी में की पढ़ाई

कोमल जिस गांव में रहते थे वहां बिजली नहीं आती थी। इसी कारण वह लालटेन में पढ़ाई करते थे। कोमल बताते हैं, "हमारा स्कूल घर से 6 किमी. की दूरी पर था। तब ऑटो से जाने के लिए जेब में पैसे नहीं होते थे। मेन रोड से टाइम ज्यादा लगता था, इसलिए हम तीनों भाई-बहन रेलवे लाइन के किनारे चलते हुए स्कूल जाते थे। आने-जाने में इतना थक जाता था कि स्कूल से लौटते ही जल्दी सो जाता था।"कोमल बताते हैं, "घर में पैसे की प्रॉब्लम के कारण बिजली का कनेक्शन नहीं लग पाया था। 2011 में मैंने हाईस्कूल बोर्ड एग्जाम की पढ़ाई लालटेन की रोशनी में की थी। मेरे 57 परसेंट मार्क्स आए थे। हमारे घर 2012 में बिजली कनेक्शन जुड़ा था। सुविधाएं मिली तो परफॉर्मेंस बेहतर हुआ। इंटरमीडिएट एग्जाम में मेरे 78 प्रतिशत मार्क्स आए थे।"

पीएम की ओर से मिली मदद

कोमल ने बताया कि पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए दो साल के कोर्स की फीस 24 हजार रुपए थी। कोमल के मुताबिक, ''मैंने पीएम नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर मदद की गुहार लगाई। लेटर लिखने के थोड़े दिन बाद ही रिप्लाई आया था कि आपकी प्रॉब्लम जल्द ही सॉल्व की जाएगी। रिप्लाई आने के कुछ दिन बाद ही लखनऊ यूनिवर्सिटी के वीसी ऑफिस से मेरे पास फोन आया। मैं पीएमओ का लेटर लेकर तत्कालीन वीसी प्रो. एसबी निम्से से मिला। उन्होंने लेटर देखने के बाद मेरी फर्स्ट सेमेस्टर की फ़ीस माफ़ कर दी।"

इस बार खास होगी डिग्री

दीक्षांत समारोह में इस बार मेधावी छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली डिग्रियां कई मायनों में खास होंगी। पहली बार इसपर विद्यार्थी की रंगीन फोटो लगी होगी। इसको ध्यान में रखते हुए विवि प्रशासन ने अपने अंकपत्र तथा डिग्री के सिक्योरिटी फीचर्स पर खास ध्यान दिया है। इससे पहले एलयू चार से पांच सिक्योरिटी फीचर वाले अंकपत्र और डिग्री देता था। अब अंकपत्र के साथ ही डिग्री पर भी विद्यार्थी की रंगीन फोटो लगी होगी। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके शर्मा ने बताया कि इन सिक्योरिटी फीचर्स की वजह से फर्जी अंकपत्र तुरंत पकड़ में आ जाएगा।