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बसपा से बिछुड़े बारी-बारी मायावती के भरोसेमंद अब सिर्फ सतीश

Mayawati reliable Satish Chandra Mishra -19 विधायकों में से बचे हैं सिर्फ सात, आखिर कैसे लड़ेंगी चुनाव

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बसपा से बिछुड़े बारी-बारी मायावती के भरोसेमंद अब सिर्फ सतीश

बसपा से बिछुड़े बारी-बारी मायावती के भरोसेमंद अब सिर्फ सतीश

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

sanjay kumar srivastava

लखनऊ. UP Assembly Election 2022 BSP strategy यूपी विधानसभा चुनाव 2022 करीब है। सभी पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। पर हाथी वाली पार्टी कुछ नए किस्म की रणनीति बना रही है। बहुजन समाज पार्टी के दो बड़े नेता लालजी वर्मा और विधायक व राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर को बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को अचानक पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। 2017 विधानसभा चुनाव में बसपा के सिर्फ 19 विधायक जीते थे। पर इस वक्त पार्टी में सिर्फ सात ही बचे हैं। हालात यह है कि बसपा से बिछुड़े बारी-बारी। कुछ को मायावती ने टाटा कर दिया और कुछ ने बहनजी से हाथ जोड़ लिया। अब तो मायावती के सिर्फ एक भरोसेमंद हैं, वो हैं सतीश चंद्र मिश्रा।

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बस उसका बसपा में काम खत्म :- कांशीराम की बसपा में दिग्गजों की एक लम्बी फेहरिस्त थी। इसमें पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राज बहादुर, आरके चौधरी, दीनानाथ भास्कर, मसूद अहमद, बरखूराम वर्मा, दद्दू प्रसाद, जंगबहादुर पटेल और सोनेलाल पटेल शामिल थे। स्वामी प्रसाद मौर्य, जुगुल किशोर, सतीश चंद्र मिश्र, रामवीर उपाध्याय, सुखदेव राजभर, जयवीर सिंह, ब्रजेश पाठक, रामअचल राजभर, इंद्रजीत सरोज, मुनकाद अली और लालजी वर्मा यह भी एक मजबूत कड़ी थे। पर दिक्कत तब आती है जब बसपा में मायावती के कद के बराबर दूसरा कोई कद बढ़ने लगता है। बस उसका बसपा में काम खत्म हो जाता है।

कुछ ने कमल तो कुछ साइकिल पर बैठे :- अब इन नेताओं में कुछ ने तो कमल का फूल सूंघना पसंद किया तो कुछ साइकिल के साथ हो गए। गुरुवार को राम अचल राजभर और लालजी वर्मा को भी मायावती ने पार्टी से विदा किया। दोनों नेता अभी भी बसपा की वफादारी की कसम खा रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर इस वक्त किसी भी बड़ी भूमिका में नजर नहीं आ रही है।

सतीश चंद्र मिश्रा पर भरोसा :- बसपा के राज्यसभा सदस्य व राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा इस वक्त इकलौते नेता हैं जो मायावती संग हैं। जिन्हे मायावती अभी तक मानती हैं। सतीश चंद्र मिश्रा का काम वैसे तो बसपा को चुनाव में जीतने का रोल अदा कराना होता है। और बचे समय में वह केंद्रीय राजनीति में बसपा की बात को रखते हैं।

नई लीडरशिप का चुनाव :- विधानसभा चुनाव 2022 से पहले पिछड़े समाज के दो बड़े नेताओं के निष्कासन के बाद बसपा में प्रदेश स्तर पर नई चेहरे तैयार करने की चुनौती है। भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर राजभर समाज में नया चेहरा जरूर दिया, पर अभी अन्य जातियों को अपने संग मिलना है। गुड्डू जमाली को विधानमंडल दल का नेता बनाकर मुस्लिम समाज में नया नेतृत्व उभारने की कोशिश की है।

19 में सात बचे :- विधानसभा चुनाव 2017 में बसपा को सिर्फ 19 सीटें मिली थीं। अंबेडकरनगर जिले के उपचुनाव में एक सीट हारने के बाद पार्टी के पास अब 18 विधायक रह गए। बसपा के 9 विधायक पहले से निलंबित चल रहे हैं, दो और के निष्कासन से अब पार्टी में सिर्फ सात विधायक बचे हैं। इन के नाम शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली, सुखदेव राजभर, श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह, मुख्तार अंसारी, विनय शंकर तिवारी और आजाद अरिमर्दन हैं।