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Taste of UP: लखनऊ की गलियों में जाड़े का जायका, बथुआ और चौरंगी पूड़ियों से सजी 1940 की विरासत

Taste of UP Special : जाड़े का मौसम आते ही लखनऊ की गलियों में बथुआ की खुशबू फैल जाती है। अकबरी गेट चौक स्थित जगदीश मिष्ठान भंडार में 1940 से बनती चौरंगी पूड़ियां आज भी स्वाद और परंपरा का अनूठा संगम पेश कर रही हैं।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 16, 2026

जाड़े का स्वाद, बथुआ की खुशबू और लखनऊ की गलियों का जायका   (फोटो सोर्स :   Ritesh Singh )     

जाड़े का स्वाद, बथुआ की खुशबू और लखनऊ की गलियों का जायका   (फोटो सोर्स :   Ritesh Singh )     

Ritesh Singh

Taste of UP Winter Flavours of Lucknow: जाड़े का मौसम आते ही अगर लखनऊ की गलियों में किसी एक स्वाद की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, तो वह है बथुआ। पोषक तत्वों से भरपूर यह मौसमी साग न सिर्फ सेहत का खजाना है, बल्कि जायके का ऐसा बादशाह है, जिसके बिना सर्दियों का दौर अधूरा सा लगता है। इन्हीं स्वादों की परंपरा को दशकों से जीवंत रखे हुए है अकबरी गेट चौक के पास, फूल वाली गली से कलियन टोला के बीच स्थित जगदीश मिष्ठान भंडार, जो वर्ष 1940 से लखनऊ के स्वाद प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है।

तंग गली, लेकिन स्वाद का समंदर

अकबरी गेट चौक की यह तंग सी गली भले ही पहली नजर में साधारण लगे, लेकिन जैसे ही यहां तवे पर उतरती पूड़ियों की खुशबू हवा में घुलती है, राहगीर खुद-ब-खुद ठहर जाते हैं। फूल वाली गली से कलियन टोला के बीच यह छोटा सा ठिया आज लखनऊ के चर्चित स्वादों में शुमार है। यहां का जायका सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इसे तलाशते हुए यहां तक पहुंचते हैं।

बथुआ: सेहत और स्वाद का संगम

बथुआ को आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। आयरन, फाइबर, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर यह साग सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ पाचन को भी दुरुस्त करता है। जगदीश मिष्ठान भंडार में बथुआ सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि परंपरा है। यहां की बथुआ की पूड़ी जाड़े के दिनों में लोगों की पहली पसंद बन जाती है।

11 से 12 मेल की चौरंगी पूड़ियां

यहां के जायके की खासियत है इसकी चौरंगी पूड़ी। एक ही थाली में 11 से 12 तरह की पूड़ियां-

  • दाल भरी पूड़ी
  • आलू वाली पूड़ी
  • चुकंदर की पूड़ी
  • बथुआ की पूड़ी

हर पूड़ी का रंग, स्वाद और खुशबू अलग। यही विविधता इसे खास बनाती है। सर्दियों में लगभग हर दूसरे दिन दुकान पर ग्राहकों की भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि यह स्वाद कितना लोकप्रिय है।

1940 में रखी गई थी नींव

इस स्वादिष्ट विरासत की शुरुआत जगदीश प्रसाद गुप्ता ने की थी। महज 6 वर्ष की उम्र में वे अपनी मां लता देवी के साथ इस जगह से जुड़े और 1940 में न्यू सन के साथ इस दुकान की नींव रखी गई। उस समय सीमित संसाधनों के बीच केवल खस्ते का स्वाद ही उपलब्ध था। लेकिन समय के साथ स्वाद बढ़ता गया, प्रयोग होते गए और यह ठिया लखनऊ के खाने की पहचान बन गया।

दूसरी पीढ़ी ने संभाली विरासत

आज इस दुकान को दूसरी पीढ़ी के रूप में सचिन भैया संभाल रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक स्वाद को बनाए रखते हुए उसमें नए प्रयोग जोड़े। लगभग हर कॉम्बिनेशन में कुछ न कुछ नया स्वाद बिठाना उनकी खासियत है। यही कारण है कि यहां रोजाना कुछ न कुछ बदला हुआ, लेकिन लाजवाब मिलता है।

सब्जियों की रंगीन दुनिया

पूड़ियों के साथ परोसी जाने वाली सब्जियां भी उतनी ही खास हैं-

  • काबुली छोले
  • घुटी मटर का लूटपुटा अंदाज
  • आलू वाडिया सोयाबीन की सब्जी
  • आलू मसाला

हर सब्जी में देसी मसालों का संतुलन और घर जैसा स्वाद साफ झलकता है। यही वजह है कि एक बार खाने वाला बार-बार यहां खिंचा चला आता है।

पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा ठिया

तंग गली होने के बावजूद यहां जगह कम नहीं पड़ती, क्योंकि स्वाद लोगों को रोक लेता है। लखनऊ घूमने आने वाले पर्यटक इस ठिए को फूड टूर का अहम हिस्सा मानने लगे हैं। मोबाइल कैमरों में तस्वीरें और वीडियो कैद होते रहते हैं, और सोशल मीडिया पर यह स्वाद तेजी से वायरल हो रहा है।

जाड़े की रौनक और पूड़ियों की महक

जाड़े के मौसम में जब बथुआ, पालक, मूली और धनिया जैसी सब्जियां बाजार में आती हैं, तब यहां पकवानों की मानो झड़ी लग जाती है। कभी आलू-पालक के पराठे, कभी मूली के पराठे, तो कभी धनिया वाले आलू-हर दिन कुछ नया और खास।

लखनऊ की तहजीब का स्वाद

जगदीश मिष्ठान भंडार सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि लखनऊ की तहज़ीब और खानपान की जीवित मिसाल है। यहां स्वाद के साथ अपनापन भी परोसा जाता है। पीढ़ियों से चला आ रहा यह ठिया आज भी उसी सादगी और ईमानदारी के साथ लोगों का दिल जीत रहा है।

  • लोकेशन: कलियन टोला, फूल वाली गली, अकबरी गेट चौक, लखनऊ
  • आउटलेट: Jagdish Mishthan Bhandar
  • स्थापना: 1940
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