
यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए अब अगले माह शुरू होगी नई जंग
पत्रिका एक्सप्लेनर
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटें अगले साल जनवरी में खाली हो रही हैं। इनमें से छह सीटों पर सपा जबकि, दो सीटें पर बसपा और तीन सीटों पर बीजेपी के सदस्य हैं। यूपी के मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर 11 विधान परिषद सीटों में से बीजेपी 8 से 9 सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, सपा की एक सीट पर जीत तय है। दूसरी सीट से उसे निर्दलीय सहित अन्य दलों के समर्थन की जरूरत होगी। इसके अलावा दो सीटों पर उपचुनाव होंगे। इसके बाद बीजेपी का आंकड़ा जरूर उच्च सदन में बढ़ेगा, लेकिन फिर भी बहुमत से दूर रहेगी। ऐसे में बीजेपी को विधान परिषद में बहुमत के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों के द्वारा होने वाले चुनाव तक का इंतजार करना पड़ेगा।
विधान परिषद में बहुमत से दूर
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं, जिनमें बहुमत के लिए 51 का आंकड़ा चाहिए. चुनाव से पहले के आंकड़े देखे तो सपा के 52, बीजेपी के 19, बसपा के 8, कांग्रेस के दो, अपना दल सोनेलाल के एक, शिक्षक दल के एक और तीन निर्दलीय सदस्य हैं. इसके अलावा कुल 14 सीटें खाली थीं, जिनमें पांच स्नातक और 6 शिक्षक कोटे की सीटों पर चुनाव हुए हैं. चुनाव के नतीजे के बाद अब सपा के सदस्यों की संख्या 55 हो गई जबकि बीजेपी के सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। वहीं, बसपा और कांग्रेस की स्थिति जस की तस है।
विधान परिषद की तीन सीटें खाली
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की तीन सीटें खाली हैं। बदायूं जिले की स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के द्वारा चुनी जाने वाली सीट खाली है। इसके अलावा नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सदस्यता चले जाने से दूसरी सीट खाली है। यह बसपा से एमएलसी थे, लेकिन उनके कांग्रेस में शामिल हो जाने के चलते सदस्यता चली गई। इसके अलावा तीसरी खाली सीट मनोनीत सदस्य की है। सपा के राम सिंह यादव का कोरोना से निधन हो गया था। राज्यपाल द्वारा मनोनीत किये जाने वाले 10 सदस्यों में से एक ये भी थे।
यह है यूपी में विधान परिषद का प्रारूप
विधान परिषद में 6 साल के लिए सदस्य चुने जाते हैं। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधान परिषद हैं। यूपी में परिषद की 100 सीटें हैं। एलएलसी चुनाव में पांच अलग-अलग तरीके से चुनकर सदस्य पहुंचते हैं। 100 में से 36 सीट स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि के द्वारा चुनी जाती हैं। इसके अलावा कुल 100 सीटों में से 1/12 यानी 8-8 सीटें शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं। 10 विधान परिषद सदस्य को राज्यपाल मनोनीत करते हैं। जो अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं। बाकी बची 38 सीटों पर विधानसभा के विधायक वोट करते हैं और विधान परिषद के विधायक चुनते हैं।
बीजेपी ने शिक्षक कोटे की तीन सीटें जीती
शिक्षक कोटे की छह सीटों पर विधान परिषद चुनाव हुए हैं, जिनमें से तीन सीटें बीजेपी, एक सपा और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती है। बीजेपी पहली बार शिक्षक कोटे की छह सीटों में से चार पर प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें मेरठ, आगरा, बरेली और लखनऊ सीट थी। बीजेपी ने वाराणसी सीट पर निर्दलीय चेतनारायण सिंह को समर्थन किया था जबकि गोरखपुर में पार्टी चुनाव नहीं लड़ी. बीजेपी शिक्षक कोटे की तीन सीटें बरेली, मेरठ और लखनऊ जीतने में कामयाब रही है जबकि सपा को एक वाराणसी सीट मिली है. इसके अलावा गोरखपुर में शर्मा गुट के ध्रुव कुमार त्रिपाठी जीते हैं जबकि आगरा से निर्दलीय डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की है।
Published on:
07 Dec 2020 06:10 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
