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अगर मिल गयी होती फायर एनओसी तो बरेली की बर्फी में भी नज़र आती हमारी मेट्रो

खराब मेट्रो को बनाने विदेश से आये अल्स्टॉम के आला अधिकारी 

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लखनऊ

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Dikshant Sharma

Sep 12, 2017

Lucknow Metro

Lucknow Metro

लखनऊ। इन दिनों बॉलीवुड में लखनऊ मेट्रो ने चर्चे बटोरने शुरू कर दिए हैं। अजय देवगन की आने वाली फिल्म की लखनऊ मेट्रो में शूटिंग को लेकर जहां सूचना विभाग से संपर्क साधा जा रहा है। लेकिन ये पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड ने लखनऊ मेट्रो से संपर्क साधा हो। जनवरी महीने में फिल्म 'बरेली की बर्फी' की शूटिंग के दौरान भी सूचना विभाग के ज़रिये मेट्रो अधिकारियों से संपर्क किया गया था। हालांकि उस समय मेट्रो का सिर्फ ट्रायल हुआ था। न ही मेट्रो के पास फायर विभाग से एनओसी थी और न ही सीएमआरएस की ओर से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट दिया गया था इसलिए मेट्रो में शूटिंग की बात नहीं बन सकी। अब मेट्रो अधिकारी मेट्रो में शूट के लिए पालिसी तैयार कर रहे हैं जो कि अगले एक हफ्ते में तैयार कर ली जाएगी। जानकारों का मानना है कि पालिसी के नॉर्म्स दिल्ली मेट्रो वाले ही होंगे लेकिन इसका शुल्क थोड़ा अलग होगा।

मांझे ने बढ़ा दी मेट्रो की मुश्किलें
पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले मांझे से समस्या पैदा होना कोई नयी बात नहीं है। लेकिन अब ये समस्या मेट्रो पर भी भारी पड़ती दिख रही है। पतंगबाजी मेट्रो को बाधित कर रही है। अभी तक बिजली के सब स्टेशन ही तार वाली पंतगबाजी से प्रभावित हो रहे थे। अब मेट्रो पर भी इसका असर दिखने लगा है। पिछले 5 दिनों में 2 बार मेट्रो पावर ट्रिप हुई है। एक बार डेपो में और दूसरी बार मेट्रो मेन लाइन पर। इससे मेट्रो संचालन भी लगभग 20 मिनट के लिए बाधित हुआ था। ये फाल्ट ओवर हेड वायर में मांझे के फसने से आयी हैं।

डायरेक्टर रोलिंग स्टॉक और ऑपरेशन्स महेंद्र सिंह ने बताया कि मांझे में मेटालिक एलिमेंट्स होते है जिसने बिजली पास करती है। मेट्रो के आने पर लाइन ट्रिप होजाती है। हर शाम को एक टीम लाइनों में फसे हुए मांझों को निकाल रही है। सबसे अधिक मांझे आलमबाग से दुर्गापुरी के बीच मिले हैं।

खराब मेट्रो को बनाने विदेश से आये अल्स्टॉम के आला अधिकारी
मेट्रो अधिकारियों की माने तो 6 सितम्बर को जो मेट्रो ट्रैन ख़राब हुई वो किसी दरवाजे के सिस्टम में फाल्ट आने के चलते हुआ है। उनका दावा है कि दो दिन बाद जो ट्रेन सिग्नलिंग सिस्टम में दिक्कत आने के चलते रुकी रही वो दोनों एक ही ट्रेन थीं। ट्रेन की मरम्मत के लिए अल्स्टॉम के शीर्ष अधिकारी भी लखनऊ पहुंचे और उन्होंने अपनी देख रेख मेट्रो की समस्या को दूर किया है।

एमडी कुमार केशव ने कहा कि 5 ट्रेन पूरी तरह फिट हैं। जो मेट्रो खराब हुई थी वो भी दुरुस्त हो चुकी है लेकिन उसे ट्रैक पर लाने से पहले डिपो में ट्रायल किये जा रहे हैं। 7 वी मेट्रो भी श्री सिटी से रवाना हो चुकी है।

बताते चलें कि प्रायोरिटी फेज के बाद चारबाग से मुनषिपुलिया तक निर्माण कार्य तेज़ी से हो रहा है। 1 ऑक्टूबर से हज़रतगंज तक तैयार हुए अंडरग्राउंड मेट्रो रुट पर ट्रैक बिछना शुरू हो जाएगा। 21 सितम्बर से सचिवालय से चारबाग की ओर टीबीएम मशीन खुदाई शुरू कर देगी। 2019 तक 21 किलोमीटर का ये रुट तैयार हो जाएगा।