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महिलाओं की तरह सजने संवरने का था शौक, पुरुषों के हुक्म चलाने से थी चिढ़, इसलिए करवा दिया जेंडर चेंज

महिला बनने की थी ख्वाहिश, तो केजीएमयू के डॉक्टरों ने पूरी की ख्वाहिश

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लखनऊ. कहते हैं कि स्त्री भगवान की अदभुत रचना होती है। बेशक एक महिला की बनावट और व्यवहार किसी भी मर्द से अलग होती है। लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसे हैं, जो मर्द होकर भी महिला बनना चाहते हैं। कुशीनगर के रहने वाले रुस्तम भी कुछ ऐसी ही ख्वाहिश रखने वालों में से थे, जिनकी मुराद केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने पूरी की।

इस वजह से लिया यह फैसला

पुरुषों की हुक्म चलाने की आदत, हर बात पर रोक-टोक करना, चीखना चिल्लाना रुस्तम को इतना खराब लगता था, कि उसने महिला बनने का फैसला ले लिया। रुस्तम को महिलाओं से हमदर्दी है। उन्हें महिलाओं के बीच अपनापन महसूस होता है। यही नहीं बल्कि वह कई-कई रातों को साज श्रंगार करता था। उनकी तरह सजना संवरना उसे बहुत पसंद है। लेकिन यह सब रुस्तम के साथ अचानक नहीं हुआ बल्कि उसे हमेशा से पुरूषों से चिढ़ थी। हर समय आदेश देना, हर बात पर अपनी चलाना उसे बिलकुल नहीं पसंद।

मजदूरी कर चलाता है घर

रुष्तम के माता पिता का इंतकाल काफी पहले हो चुका था। वह अपनी बड़ी बहन के साथ रहते हैं। गर चलाने के लिए मजदूरी करती हैं। जिंदगी जैसे तैसे कट तो रही थी, लेकिन उसकी महिला बनने की चाहत तब तकस अधूरी थी, जब तक उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के बारे में नहीं पता लगा। वहां जाने के बाद केजीएमयू जाने की सलाह दी गयी।

कई दफा हुई काउंसलिंग पर नहीं बदला फैसला

मनोचिकित्सक विभाग की टाम ने रूष्तम की काउंसलिंग की। उसका माउंडसेट बदलने की कोशिश भी की, लेकिन महिला बनने की जिद पर वह अ़ड़ा रहा। इसके बाद सेक्स री एसाइनमेंट सर्जरी की प्रक्रिया शुरू हुई। उसे आठ महीने तक हार्मोंस थेरैपी दी गयी। इससे शारीरिक बदलाव के साथ ही आवाज में भी बदली की गयी। हालांकि, रूष्तम की महिला बनने की ख्वाहिश पूरी जरूर हो गयी लेकिन मातृत्व का सुख हासिल नहीं होगा।

दस घंटों तक रखा बेहोश

केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हे़ड प्रो. एके सिंह के मुताबिक सर्जरी करने के लिए रुष्तम को करीब दस घंटों तक बेहोश किया गया। लेकिन सर्जरी अच्छे से बिना किसी कॉम्पलीकेशन के पूरी हुई। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हुए।

इस टीम ने मिलकर की सर्जरी

प्रो. एके सिंह के साथ डॉ. मुक्ता, डॉ. गुरू रेड्डी, डॉ. निखिल, डॉ. दीपा सिंह और डॉ. तनमय शामिल रहे।