
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. राजधानी लखनऊ-प्रयागराज सहित देश के सभी 39 मिलिट्री डेयरी फार्म बुधवार को औपचारिक रूप से बंद कर दिये गये। साथ ही फॉर्म का ध्वज भी उतार दिया गया। अब इन फार्मों के मवेशियों को कम कीमत पर सरकारी विभागों के फार्मों और सहकारी कोऑपरेटिव की डेयरियों को दे दिया जाएगा। इसके अलावा यहां कार्यरत कर्मचारियों को अन्य संबंधित विभागों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। मिलिट्री डेयरी फार्मों की उपयोगिता खत्म होने की वजह से रक्षा मंत्रालय ने तीन वर्ष पहले ही सभी को बंद करने की घोषणा की थी। सेना के जवानों और अफसरों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1889 में देश का पहला मिलिट्री डेयरी फार्म उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद छावनी में खोला गया था। इसके बाद लखनऊ सहित कई प्रदेशों में सैन्य डेयरी फार्म खोले गये।
कैंट स्थित लखनऊ डेयरी फार्म में क्रिसवाल नस्ल की 1100 गायें थीं जो रोजाना छह हजार लीटर दूध देती थीं। वर्ष 2015 से 2017 के बीच इनमें से 337 गायें मर गईं। गायों की मौत की वजह रक्त संक्रमण और टीबी रोग बताया गया। मामले में सेना की ओर से कोर्ट ऑफ इन्कवॉयरी भी गठित की गई थी। वर्ष 2017 में ही रक्षा मंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी हुआ, जिसमें देश के सभी मिलिट्री डेयरी फार्मों को बंद करने की बात कही गई। इसमें लखनऊ का डेयरी फार्म भी शामिल था।
रक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद छावनी स्थित लखनऊ डेयरी फार्म जुलाई 2018 में ही बंद कर दिया गया था। अगले महीने यानी अगस्त 2018 में यहां की गायों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद सेना ने लखनऊ डेयरी फार्म की सभी गायों को 1000 रुपए की दर से उत्तराखंड सरकार को बेच दिया था। लखनऊ डेयरी फार्म को बंद करने की औपचारिक घोषणा 31 मार्च 2021 को हुई।
डेयरी फार्मों के रखरखाव में खर्च हो रहे थे करोड़ों
लेफ्टिनेंट जनरल शशांक मिश्रा ने बताया कि सैन्य डेयरी फार्मों के रखरखाव में सालाना करीब 300 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे। वहीं, दूध अब हर जगह उपलब्ध है इसलिए इन फार्मों को बंद करके उनकी जमीनों को सेना के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। डेयरी की सभी गायों को राज्यों को सौंपने का फैसला किया गया है।
Published on:
01 Apr 2021 05:56 pm

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