
अल्ट्रासाउंड सेंटर्स में गड़बड़ी। फोटो सोर्स-Ai
Misbehavior With Pregnant Women: उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में फैली लापरवाही, अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के मामलों पर बड़ा एक्शन लिया है। डिप्टी CM और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर कई जिलों में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई शुरू की गई है। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कई डॉक्टर लंबे समय से बिना सूचना ड्यूटी से गायब थे, जबकि कुछ अधिकारियों पर निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके बाद शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया और कई मामलों में विभागीय जांच बैठा दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला कि कई चिकित्सक महीनों से बिना अनुमति अनुपस्थित चल रहे थे। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सरकार ने पांच डॉक्टरों को सेवा से हटाने का फैसला लिया। जिन डॉक्टरों को बर्खास्त किया गया है उनमें जिला अस्पताल गोरखपुर की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर के डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और ड्यूटी में कोताही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
अंबेडकरनगर के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण में अनियमितता के आरोप लगे हैं। जांच में शासनादेशों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों को नियमों के विपरीत अनुमति देने और प्रक्रियाओं में गड़बड़ी की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं।
हरदोई जिले के संडीला में तैनात चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर क्षेत्र में संचालित अवैध निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप है। शासन ने इस मामले को गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार का मानना है कि अवैध अस्पतालों के संचालन से मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल पर सहकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। शिकायतों के आधार पर शासन ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। वहीं झांसी के ट्रॉमा सेंटर मोठ में तैनात आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू को सरकारी सेवा के दौरान निजी प्रैक्टिस करते हुए पकड़ा गया। इसके बाद उनकी दो वेतनवृद्धियां रोक दी गईं।
हमीरपुर में तैनात डॉ. लालमणि पर प्रसूताओं से अवैध वसूली और दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद शासन ने उनकी तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया है।
इसके अलावा मथुरा जिला अस्पताल के डॉ. देवेंद्र कुमार और डॉ. विकास मिश्रा पर गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
सुल्तानपुर के लम्भुआ क्षेत्र में महिला मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने के मामले में तत्कालीन अधीक्षक और फार्मासिस्ट पर कार्रवाई की गई है। वहीं प्रयागराज के डॉ. शमीम अख्तर को प्रशासनिक नियंत्रण में कमी पाए जाने पर ट्रांसफर करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
इसके अलावा प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. आदित्य पाण्डेय पर सहकर्मी से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें वापस रायबरेली भेज दिया गया है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लगातार स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कर रहे हैं। हालिया कार्रवाई को सरकार का बड़ा संदेश माना जा रहा है कि सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासन का कहना है कि मरीजों को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी।
Updated on:
08 May 2026 07:03 pm
Published on:
08 May 2026 12:32 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
