बीते दिनों सपा के बडे नेताओं की एक बैठक हुई थी। उस बैठक के बाद पार्टी के महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि पार्टी जल्द ही कठोर कदम उठाने जा रही है। दागी और निष्क्रिय मंत्रियों को हटाने का अखिलेश यादव के पास यह सबसे अच्छा मौका था। इसीलिए जहां उन मंत्रियों को उनके विभाग से हटा दिया, जिनसे वे कडक आवाज में बात भी नहीं कर पाते थे। इसमें स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा संभाल रहे अहमद हसन और अम्बिका चौधरी जैसे वरिष्ठ मंत्री मुख्य हैं। अहमद हसन स्वास्थ्य विभाग में न तो अपनी हनक बना पा रहे थे और न ही ऐसी जन कल्याण की योजनाएं लांच कर पा रहे थे, जिससे आम जनता को तात्कालिक राहत मिले। अम्बिका चौधरी भी इसी प्रकार अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहे थे। राम गोविंद चैधरी, महबूब अली, ब्रह्म शंकर त्रिपाठी, अम्बिका चैधरी, पारस नाथ यादव, दुर्गा प्रसाद यादव के विभाग भी इसीलिए छीने गए, क्योंकि ये विवादों के घेर में फंसते जा रहे थे।