Modi Mango: लखनऊ शहर पूरी दुनिया में फलों के राजा आम के लिए जाना जाता है। यहां मलिहाबाद का पूरा बेल्ट ही आम के बगीचों से गुलजार रहता है। जिसमें दशहरी आम की धाक रहती है, जिसके स्वाद के मुरीद पूर्व प्रधानमंत्री अटली जी हुआ करते थे। आम की विभिन्न वेरायटी के बीच इस बार मोदी आम आ रहा है, जिसे चखना न भूले।
लखनऊ से सटे मलिहाबाद के कलीमुल्ला को आम की विभिन्न किस्में तैयार करने में महारत हासिल है। लेकिन इस बार यही के किसान उपेंद्र सिंह ने देसी आम की नई प्रजाती तैयार की है जो आजकल चर्चा में बना हुआ है। चर्चा आम के स्वाद को लेकर तो है ही, बल्कि इसके नाम को लेकर चर्चा है। उन्होंने अपनी नई प्रजाति के आम का नाम मोदी आम रख दिया है। जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोडक़र देखा जा रहा है। उनका दावा है कि हल्की मिठास वाले इस देसी आम में दशहरी की तरह रेशा कम और गूदा अधिक है, साथ ही इसका स्वाद भी दशहरी से अधिक टेस्टी होगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने मोदी आम को दिया सर्टिफिकेट
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर के उपमहानिदेशक नंत कुमार ने उपेंद्र सिंह को इसका सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। मलिहाबाद के नवीपनाह निवासी उपेंद्र सिंह अवध आम उत्पादक बागवानी समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी भी हैं। यह समिति केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के साथ मिलकर कार्य करती है। उन्होंने मोदी आम की नई किस्म तैयार करने का काम साल 2019 में शुरू किया था। जिसे उन्होंने 2021 में इसे तैयार कर मैंगो फेस्टिवल में पेश भी किया था।
कैसे तैयार हुआ मोदी आम
यह देसी तुकमी आम की कलम से तैयार किया गया है। देसी आम का हर पौधा अलग-अलग तरह से होता है। इसी तरह देसी आम खाने से लेकर स्वाद और बनावट तक कई प्रकार के होते हैं। ऐसे ही दो अच्छी किस्म के देसी आमों की कलम जोडक़र तीसरा देसी आम मोदी आम तैयार किया गया है। सामान्य रुप से आम की मिठास टीएसएच से नापा जाता है, जो आमतौर पर 20 से 22 रहता है। मोदी आम की मिठास कम है, इसलिए इसके खराब होने की संभावना भी कम है। अधिक मीठे आम जल्दी खराब हो जाते हैं।