शायद ही आपको पता हो कि डीएम राजशेखर के जीवन में एक ऐसा पड़ाव आया था जिसे पार करने में यदि उनकी मां ने उनका साथ नहीं दिया होता, तो शायद वे आज आईएएस नहीं बन पाते। साल 2001 में राजशेखर की कर्नाटक में सरकारी नौकरी लग गई थी। नौकरी लगने के बाद घर में खुशी का महौल था, लेकिन राजशेखर उस नौकरी को नहीं करना चाहते थे। बल्कि इस नौकरी को छोड़ के आईएएस के लिए तैयारी करना चाहते थे, लेकिन इस सरकारी नौकरी को छोड़ के सिविल की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था।
ऐसी परिस्थिति में राज शेखर ने तो मन ही मन में नौकरी छोड़ के आईएएस की तैयारी के लिए दिल्ली में रहने का प्लान बना लिया था। कहीं न कहीं पारिवारिक दबाव उन्हें ऐसा करने से रोक रहा था। इस दुविधा की स्थिति में मां ने उनकी मदद की व आईएएस की तैयारी करने के लिए पूरी छूट दी और परिवार के सदस्यों को समझाते हुए कहां कि यदि शेखर को विश्वास है कि वो आईएएस बन सकता है तो उसे तैयारी करने की पूरी आजादी है।
मां के इस फैसले ने तो जैसे शेखर के आत्मविश्वास को दोगुना कर दिया। राजशेखर का कहना है कि अगर मां ने सही समय पर ये फैसला नहीं लिया होता तो शायद मैं अपना इरादा बदल लेता व आज आईएएस नहीं बन सकता।