
मैंने सभापति महोदय को चिट्ठी भी लिखी है।
लखनऊ, यूपी में अब सच बोलने का इनाम ‘मुक़दमा’ बन चुका है। सरकार से सवाल पूछने पर कभी पत्रकारों पर, कभी अधिकारियों पर तो कभी जनसेवकों पर मुक़दमा कर दिया जाता है। ऐसा अत्याचार तो अंग्रेजों ने नहीं किया।
मैं भी उत्तरप्रदेश का बेटा हूँ, यहीं की मिट्टी में पला बढ़ा और यहीं का पानी पीया। यहाँ का हर घर मेरा घर है और बच्चा बच्चा मेरा परिवार। अतः यहाँ की समस्याओं पर बोलने और सरकार से सवाल पूछने का हक मुझे जनप्रतिनिधि होने से पहले यहाँ का निवासी होने के कारण है। उसे कोई छीन नहीं सकता।
मैं आज उत्तरप्रदेश की जनता से यह वादा करता हूँ कि 9 क्या अगर यह 900 मुकदमे भी कर लें तो मैं जन सरोकार की राजनीति नहीं छोड़ूगा। इस ‘अघोषित आपातकाल’ में आप सभी का सहयोग जरूरी है, आपका सहयोग ही तानाशाही के अंत का कारण बनेगा। इस सम्बंध में मैंने सभापति महोदय को चिट्ठी भी लिखी है।
Published on:
20 Aug 2020 09:50 pm
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