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योगी सरकार ने जब्त किया मुख्तार अंसारी, उनकी पत्नी और बेटों का पासपोर्ट

सभी का पासपोर्ट पुलिस के पास जमा कराया गया सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया आतंकी, कहा बचा रही पंजाब सरकार

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुख्तार अंसारी और उनके परिवार पर शिकंजा और कस दिया है। यूपी सरकार ने पंजाब जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, उनकी पत्नी और दोनों बेटों के पासपोर्ट जब्त कर लिये हैं। बताते चलें कि यूपी में मुख्तार की पत्नी और दोनों बेटे मुकदमों में वांछित हैं। तीनों पर यूपी में 25-25 हजार का ईनाम घोषित है। हालांकि पिछले दिनों एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार की पत्नी अफशां अंसारी को सशर्त अग्रिम अंतरिम जमानत दी है।


उधर मुख्तार अंसारी को पंजाब से लाकर यूपी जेल में शिफ्ट करने में अब तक नाकामयाब रही योगी सरकार अब इस मामले में पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। यूपी सरकार ने याचिका दाखिल कर पंजाब सरकार पर मुख्तार अंसारी को बचाने का आरोप लगाते हुए, हवाला दिया है कि यूपी में कई गंभीर मामलों में मुख्तार अंसारी को कोर्ट में पेश किया जाना है, पंजाब की जेल में रहते ऐसा नहीं हो पा रहा है, इसलिये मुख्तार को यूपी के जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया जाए।


सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था। सोमवार को हुई सुनवाई में मुख्तार अंसारी की ओर से खुद को ऐसे परिवार से आने का हवाला दिया गया है, जिसके सदस्य देश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया। बड़े पदों पर रहे और देश की रक्षा में आगे रहे। मुख्तार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यूपी जेल में ट्रांसफर किये जाने का विरोध किया है।

मुख्तार ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह यूपी के मऊ से पांच बार से विधायक हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और 1927-28 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे डाॅ. मुख्तार अंसारी उनके दादा थे, वह जामिया मिल्लिया युनविर्सिटी के संस्थापकों में से एक रहे। पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, तत्कालीन ओडिशा के राज्यपाल बाबा शौकतुल्ला अंसारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस आसिफ अंसारी और खुद उनके पिता सुभानल्लाह अंसारी स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता रहे। इसके अलावा उनके नाना ब्रेगेडियर उस्मान से जो 3 जुलाई 1948 को भारत-पाकिस्तान युद्घ में कश्मीर के लिये दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। इसके लिये मरणोपरांत महावीर चक्र के लिये उनके नाम का चयन हुआ था।