लखनऊ."अखिलेश का मतलब है अनश्वर, इसलिएउनकीविचारधाराऔर सिद्धांत दोनों हीअविनाशीऔरअमर हैं। उनकी सफलता के पीछे डिंपल भाभी है जिनका स्नेह और साथ अमूल्य है", ये बातें समाजवादी पार्टी परिवार की सबसे छोटी बहू अपर्णा बिष्ट यादव ने पिछले वर्ष एक इंटव्यू के दौरान कहीं थी, जब सब जगह चर्चा ये थी कि परिवार में सब कुछ ठीक नहीं है और राजनीतिक इच्छाओं के चलते ये छोटी बहु सबके खिलाफ चली गई है।
कई लोगों का मानना है कि अपर्णा के दिल में कुछ और, दिमाग में कुछ और चल रहा है हालांकि सपा मुखिया के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी इस पर सफाई देते हुए कहती हैं कि वो अपने दिल की सुनती हैं, दिमाग की नहीं। लेकिन क्या वाकई में ऐसा हैं?
2017 के चुनाव को लेकर भजपा और सपा आमने-सामने हैं, वहीं इसी बीच जब 22 जनवरी को मुलायम की ये छोटी बहू बीबीएयू के दीक्षांत समारोह में पहुंची तो सब हैरान रह गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। और उन्हीं के लिए अपर्णा के मीठे शब्द सपा परिवार के दिल पर तीखे वार की तरह थे। हालांकि इसे राजनीति मंशा से न जोड़ते हुए अपर्णा ने कहा कि यूनीवर्सिटी के बुलाने पर वो वहां गई थी, किसी और मकसद से नहीं।
ये पहली बार नहीं था जब अपर्णा ने पार्टी के फैसलों के विपरीत कदम उठाए हों और राजनीतिक गलियारों में असमंजस की स्थिति पैदा की हो।
- याद हो कि 2014 में सपा की अहम बैठक में प्रतीक और अपर्णा दोनों ही शामिल हुए थे और अखिलेश-डिंपल के करीब ही बैठे थे। लेकिन पार्टी की बैठक में मोदी के गुण गाने वाली अपर्णा ने हर तरफ हलचल मचा दी थी।
- एक और कयास का जन्म तब हुआ जब वे मुलायम सिंह के महाराजसी जन्मदिवस में शिरकत करने के बजाय पति प्रतीक के साथ दुबई चली गई थीं।
- जब डिंपल यादव ने सरकार की 1090 महिला हेल्पलाइन सेवा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था, तो अपर्णा ने फौरन कहा कि पुलिस की 100 नंबर सेवा सरकार की हेल्पलाइन से बेहतर है।
-पिछले ही वर्ष नवम्बर में उन्होंने आमिर खान के असहिष्णुता वाले बयान केे खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी, ये जानते हुए कि उनके ससुरजी ने इस मामले में आमिर का समर्थन किया था।
अपर्णा के पति प्रतीक के सियासत में कदम रखने की खबरें अक्सर आती रहीं हैं, लेकिन उन्होंने 2015 में अपने जिम के लॉन्च पर साफ कहा था कि उनकी सियासत में कोई दिलचस्पी नहीं है। वो पहले ही रियल एस्टेट के कारोबार में जमें हुए थे, और अब तो वह फिटनेस के बिज़नेस में भी आ चुके हैं। हालांकि ये भी कहा जाता है कि मुलायम सिंह खुद नहीं चाहते कि प्रतीक सियासत में आएं और वो शायद इस वजह से क्योंकि वे नहीं चाहते कि अखिलेश के लिए घर में कोई सियासी टकराव के हालात पैदा हों।
लेकिन इसके विपरीत सत्ता में आने की इच्छा रखने वाली अपर्णा कई भरसक प्रयास करती आ रही हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए अपने गानों की सीडी भी जाारी की थी जिसमें साजिद-वाजिद का संगीत था। खबरों की माने तो अपर्णा अपने एक गीत को पार्टी का थीम सॉन्ग बनवाना चाहती थीं, पर उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई।
अपर्णा ने 2014 में एक संवाददाता सम्मेलन में साफ तौर पर कहा था कि अपने कारोबारी पति के विपरीत वो राजनीति में पूरी दिलचस्पी रखती हैं, "मैं राजनीति शास्त्र की छात्रा रही हूं और एक राजनीतिक पर्यवेक्षक के रूप में भी काम कर चुकी हूं।" एक बच्चे की मां अपर्णा मेनचेस्टर विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री हासिल कर चुकी हैं। लखनऊ के भातखंडे संगीत विद्यालय से उन्होंने संगीत की तालीम ली है। वे पूर्व पत्रकार अरविंद सिंह बिष्ट की बेटी हैं जो इस समय सूचना आयुक्त हैं।
अपर्णा में राजनीति में आने की इच्छा तो साफ झलकती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये बात ही पार्टी में कौतुहल पैदा कर रही है। आखिर इसका क्या अंजाम होगा, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
अंत में सवाल यहीं है कि यूपी के सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी सपा की सबसे छोटी बहू को क्या राजनीति में दर्जा मिलेगा या आगे भी परिवार में टकराव की स्थिति दिखती रहेगी?