डॉ.संजीव.
लखनऊ. लम्बी जद्दोजहद, खींचतान और मान-मनौव्वल की तमाम कोशिशें विफल होने के बाद एक बार फिर समाजवादी पार्टी घमासान के शिखर पर पहुंच गयी है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा पहले रामगोपाल यादव और फिर अखिलेश यादव को पार्टी से निकाले जाने के बाद अब राहें जुदा-जुदा होने के साथ अगले दो दिन शक्ति प्रदर्शन वाले होंंगे। वैसे माना जा रहा है कि एक बार फिर मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे और अपनी ताकत दोबारा दिखाएंगे।
समाजवादी पार्टी में चल रहा घमासान कभी अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले मुलायम द्वारा उन्हें पार्टी से निकाले जाने तक पहुंच जाएगा, यह उम्मीद राजनीतिक विश्लेषकों तक को नहीं थी। एक बार संधि का वातावरण बन जाने और रामगोपाल यादव की वापसी हो जाने के बाद इस बार भी लग रहा था कि मुलायम सारी स्थितियों को संभाल लेंगे, लेकिन हुआ इसका उलटा। जिस तरह मुलायम ने अपने बेटे अखिलेश को ही पार्टी से निकालने का फैसला कर लिया है, उससे तय है कि मुलायम इस बार आर-पार के मूड में हैं। मुलायम के नजदीकी सूत्र बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी की ओर से स्वयं मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित होने के बाद न सिर्फ पुराने समाजवादी सक्रिय होंगे, बल्कि तमाम ऐसे लोग भी मुलायम-शिवपाल खेमे में बने रहेंगे, जो शिवपाल या किसी अन्य को मुख्यमंत्री बनाए जाने की स्थिति में अखिलेश के साथ जा सकते थे।
लड़ाई बाप-बेटे की
अखिलेश बनाम शिवपाल शुरू हुई यह लड़ाई अब सीधे बाप-बेटे के बीच संघर्ष में बदल गयी है। यही कारण है कि शिवपाल समर्थक भी मुलायम को ही मुख्यमंत्री बनाने की बात कहकर चुनाव मैदान में जाने का मन बना चुके हैं। जनता के बीच अखिलेश की सकारात्मक छवि व अन्य दलों के साथ जोड़-तोड़ की सभावनाओं के चलते अखिलेश विरोधी खेमे को भी लगता है कि मुलायम ही उनके खेमे के सर्वश्रेष्ठ दावेदार हो सकते हैं। ऐसे में चुनाव मैदान में अखिलेश बनाम मुलायम होने से पूरी लड़ाई बाप-बेटे के बीच सिमट जाएगी। दूसरे, मुलायम के साथ मुस्लिम भी एकजुट होकर सपा से जुड़ सकते हैं, यह तर्क भी रखा जा रहा है।
नये साल के नये संदेश
समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए नया साल तमाम नये संदेश लेकर सामने आएगा। 2016 के आखिरी दिन यानी, 31 दिसंबर को मुलायम सिंह यादव ने सभी प्रत्याशियों की बैठक बुलाई है, इसमें यह देखा जाएगा कि घोषित प्रत्याशियों में से कितने मुलायम सिंह के साथ हैं। 2017 के पहले दिन अखिलेश समर्थकों ने राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाया है। उस दिन यह तय होगा कि कितने लोग अखिलेश के साथ हैं। इसके बाद ही नये साल में अलग-अलग राहों पर चल कर दोनों खेमे विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटेंगे। हालांकि अभी से अलग पार्टी व अलग चुनाव चिह्न जैसी चर्चाएं भी शुरू हो गयी हैं।
क्या करेंगे अखिलेश-मुलायम
अलग-अलग सूची और पार्टी से निकाले जाने तक की नौबत आने के बाद अब यह विचार विमर्श चल रहा है कि अखिलेश व मुलायम का अगला कदम क्या होगा। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मुलायम सिंह यादव अपनी ओर से प्रदेश सरकार को डिस्टर्ब नहीं करेंगे। वे चुनाव आयोग को लिखकर दे देंगे कि अखिलेश यादव को पार्टी से निकाला जा चुका है। उधर अखिलेश विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने के बाद कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लेंगे।