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अब यह लोग नहीं दे पाएंगे मुंशी-मौलवी की परीक्षा, आलिम-कामिल और फाजिल को लेकर भी हुआ बड़ा बदलाव

- उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद बोर्ड ने तय की कोर्स पूरा करने की सीमा - 14 साल से कम उम्र तो नहीं दे सकेंगे मुंशी-मौलवी की परीक्षा - अभी तक निर्धारित नहीं थी कोर्स की समय सीमा

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Nov 15, 2019

 अब यह लोग नहीं दे पाएंगे मुंशी-मौलवी की परीक्षा, आलिम-कामिल और फाजिल को लेकर भी हुआ बड़ा बदलाव

अब यह लोग नहीं दे पाएंगे मुंशी-मौलवी की परीक्षा, आलिम-कामिल और फाजिल को लेकर भी हुआ बड़ा बदलाव

लखनऊ. मुंशी-मौलवी की परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम उम्र सीमा को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने बोर्ड की शुरुआती परीक्षा मुंशी-मौलवी के लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम उम्र सीमा निर्धारित कर दी है। इसके साथ ही परिषद ने मदरसा शिक्षा के कई कोर्सों को पूरा करने की अवधि भी निर्धारित कर दी है। अगर कोई अभ्यर्थी ये कोर्स निर्धारित अवधि में पूरा नहीं कर पाता है तो उसे फिर से आवेदन करना होगा।

मुंशी-मौलवी परीक्षा के लिये उम्र निर्धारित

अब 14 साल से कम उम्र के अभ्यर्थी मुंशी-मौलवी की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। फैसले के मुताबिक साल 2020 की मुंशी-मौलवी परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की न्यूनतम उम्र 31 मार्च 2020 को 14 साल होनी चाहिए। आपको बता दें कि अब तक मदरसा शिक्षा की डिग्री के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं थी। मदरसा शिक्षा की मुंशी-मौलवी, आलिम के दो साल, कामिल के तीन और फाजिल की डिग्री के दो साल के कोर्स को पूरा करने की कोई समय-सीमा नहीं थी। लेकिन बोर्ड ने अब सभी कोर्सों को पूरा करने की समय-सीमा निर्धारित कर दी है।

न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित

मदरसा शिक्षा परिषद के मुताबिक उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद को छोड़कर बाकी सभी बोर्डों की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित है। नये नियमों के मुताबिक रिजल्ट घोषित होने वाले साल की 31 मार्च को मुंशी-मौलवी की परीक्षा देने वाले की न्यूनतम आयु 14 साल होना जरूरी होगी। इसके साथ मदरसा शिक्षा की एक डिग्री पूरी करने के लिए भी समय-सीमा तय कर दी गई है।

4 साल में पूरा करना होगा कोर्स

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद बोर्ड के फैसले के मुताबिक मुंशी-मौलवी और आलिम के दो वर्षीय कोर्स को अधिकतम 4 साल, कामिल के तीन वर्षीय कोर्स को अधिकतम 6 साल तक फाजिल के दो वर्षीय कोर्स को अब अधिकतम 4 साल में ही पूरा करना होगा।

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