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मुस्कुराते हुए लखनऊ को देखकर लगता है- तुझको आदाब करूं और तुझे सलाम कहूं

राजधानी लखनऊ में वो सब कुछ है एक शहर को पूरा करता है।

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लखनऊ. राजधानी लखनऊ में वो सब कुछ है एक शहर को पूरा करता है। कल्चर, इमारतें, फूड-स्टाल, तहजीब, अदब, सुविधाएं आदि। यही कारण है कि मशहूर युवा कवि पंकज प्रसून का कहना है कि लखनऊ में मुस्कुराने की कई वजह हैं। उन्हीं वजहों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक कविता लिखी है-

तुझको आदाब करूँ और तुझे सलाम कहूँ

ख़्वाब सा एक शहर
इश्क की एक नज़र
वक़्त के नब्ज़ पे है
क्रांति की एक लहर

तुझको तहज़ीब-ओ-तमद्दुन का नया नाम कहूँ
तुझको आदाब करूँ और तुझे सलाम कहूँ

पाँव में घुंघुरू की झंकार फ़िज़ाओं में सतरंग खुमार
दिलों की गलियों में गुलज़ार
ये चंचल शोख और मस्त बहार
अवध की जान नवाबी शान नज़ाकत है जिसकी पहचान वेद श्लोक सुरों के साथ जुगलबंदी नित करे अज़ान

गंगा-जमनी तेरी तहज़ीब का पैगाम कहूँ.
तुझको आदाब करूँ और तुझे सलाम कहूँ

दिलों में 'जोश' ज़ुबां पर 'मीर' यहाँ अलमस्त कलंदर पीर रवायत-रस्मों का उन्माद
निखरते रंगों की तासीर

बहुत रंगीन तुम्हारी शाम नज़र किस तरह करे आराम
रात की बिखरी निखरी ज़ुल्फ़ भरे चाहत के खाली जाम

तेरी आग़ोश को तस्कीन के आयाम कहूँ
तुझको आदाब करूँ और तुझे सलाम कहूँ.

-पंकज प्रसून

घूमने के लिए हैं लखनऊ में कई जगह हैं। ऐसी ही दो ऐतिहासिक जगहों के बारे में हम आपको बता रहे हैं जहां चेहरे पर मुस्कुराहट आ ही जाती है-

बड़ा ईमामबाड़ा

बड़ा ईमामबाड़ा लखनऊ के चौथे नवाब आसिफ उद दौला ने 1783 में बनवाया था जिसकी वजह से इसका असली नाम आसिफ इमामबाड़ा भी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी बनावट जो कि मुगल और राजपूत वास्तुकला का मिश्रण है। ये इमारत बिना किसी लोहे की सरिया के बनी हुई है और इसकी छत पर कोई सपोर्ट नहीं दिया गया है। इमामबाड़ा जाना जाता है यहॉ की भूलभलैया की वजह से जहॉ बिना गाईड के जाना खतरे से खाली नहीं है। यहॉ आपको वो नल भी नज़र आएगा जिसे गदर फ़िल्म में सनी देओल ने उखाड़ा था।

छत्तर मंजिल

छत्तर मंजिल इतिहास इसलिए इतना रोमांचक है क्योंकि इस महल को कई शासकों ने अलग अलग समय पर बनवाया है। यहां भूमिगत हिस्सों को तहखाने के नाम से जाना जाता है। इन तह़खानों को गोमती नदी के पानी में बनाया गया है जिसके कारण यह भंयकर गर्मियों के दौरान भी ठंडाते हैं। यह पैलेस पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है और साथ ही साथ कई प्रमुख फोटोग्राफर जैसे – सैमुअल बॉर्न, डारोगाह उब्बारस अली, फेलिस बीओट और थॉमस रस्ट भी इन जगहों पर की गई फोटोग्राफी के लिए ही प्रसिद्ध हुए थे।