
मशहूर शायर अशोक साहिल का आज जन्मदिन है। उर्दू दुनिया में अशोक साहिल के नाम से मशहूर होने वाले अशोक कुमार भगत 4 नवंबर 1955 में पैदा हुए थे। अशोक साहिल भले ही दो साल पहले दुनिया छोड़ गए लेकिन उन्होंने अपनी शायरी से जो पहचान बनाई, उसने उनको हमेशा के लिए अमर कर दिया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पैदा हुए और रहे अशोक ने हमेशा लोगों को जोड़ने पर जोर दिया। वो हमेशा हिन्दू-मुस्लिम एकता, हिन्दी-उर्दू के मिलाप की बातें करते रहे। उनके शेर आज भी लोग अपनी तकरीरों में इस्तेमाल करते हैं।
परिवार ने झेला था बंटवारे का दर्द
अशोक साहिल का परिवार पाकिस्तान के बहावलपुर में रहता था। उनके पिता और दादा बंटवारे में सब छोड़कर भारत आए और मुजफ्फरनगर में बसा था। तमाम संघर्षों और परेशानियों ने साहिल को एकता का हामी बना दिया।
पैंगबर के लिए लिखे शेरों ने जीता दिल
अशोक साहिल जन्म से हिन्दू थे लेकिन जब वो मुशायरों में पैंगबर मुहम्मद की शान में नात पढ़ते थे तो लोग हैरत से बस उनको देखते रहते थे। अशोक साहिल वो शायर थे जिन्होंने लिखा-
रसूल अल्लाह जो तुमने बनाए उन उसूलों को
ज़रा ताखीर से लेकिन अमल में ला रहा हूं मैं।
इसी खूबी से खुश होकर मुझे तुम बख्शवा देना
कि हिन्दू होके इस्लामी तराने गा रहा हूं मैं।।
ना सबूत है ना दलील है
मेरे साथ रब्बे जलील है।
तेरा नाम है कितना मुख्तसर
तेरा जिक्र कितना तवील है।।
मुझे मजहब के तराजू पर ना तौला जाए...
हिन्दू मुस्लिम के दंगे और झगड़े असोक साहिल को हमेशा परेशान करते रहे। उन्होंने अपनी कलम से इस आग को शान्त करने की हर मुमकिन कोशिश भी की। उन्होंने लिखा था-
मैं तुम्हें अपने उसूलों की कसम देता हूं
मुझे मजहब के ताराजू में ना तौला जाए।
मैंने इंसान ही रहने की कसम खाई है
मुझको हिंदु या मुसलमान ना बोला जाए।।
उर्दू हिन्दी को लेकर जब टकराव की बातें कही गईं तो अशोक साहिल ने लिखा-
उर्दू के चंद लफ़्ज हैं जब से ज़बान पर
तहज़ीब मेहरबाँ है मेरे ख़ानदान पर।
आम लोगों के संघर्ष को दी जुबान
अशोक साहिल की शायरी में आम आदमी की जिंदगी की जद्दोजहद हमेशा जगह पाती रही। शायद इसकी वजह उनका अपनी जिंदगी का संघर्ष भी था। उन्होंने लिखा-
तुम्हें पांव में चप्पल ना होने मलाल है मेरे भाई
मगर उन्हें भी तो देखो जो पांव से महरूम होते हैं।
दो साल पहले छोड़ गए थे दुनिया
अशोक साहिल 64 साल की उम्र में 24 अगस्त, 2020 में निधन हो गया था। अशोक कुमार भगत उर्फ अशोक साहिल अपने आखिरी दिनों में किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे।
Updated on:
04 Nov 2022 10:39 am
Published on:
04 Nov 2022 09:52 am
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