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शिवपाल यादव को मिला सपा के पूर्व नेता का साथ, केशव प्रसाद मौर्या ने मुलायम को लेकर कर दिया बड़ा एलान

सपा नेता शिवपाल सिंह यादव द्वारा समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन के पीछे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा का हाथ बताया है।
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लखनऊ

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Abhishek Gupta

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Updated: 29 Aug 2018, 5:59 PM IST

Naresh Keshav

Naresh Keshav

लखनऊ. सपा नेता शिवपाल सिंह यादव द्वारा समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन के पीछे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा का हाथ बताया है। अखिलेश ने इसे चुनावों से जोड़ते हुए आशंका जाहिर की है कि इसके पीछे भाजपा का हाथ हो सकता है। इस पर भाजपा के कई नेता उनपर हमलावर होते हुए दिख रहे हैं। सपा के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए उन्हें अवसरवाद बताया है। तो वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व भाजपा प्रवक्ता ने अखिलेश को आड़े हाथों लिया है।

भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने शिवपाल के सेक्युलर मोर्चे के गठन के फैसले को अखिलेश यादव के अवसरवाद का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव अवसरवादी नेता हैं। शिवपाल यादव ने जो किया वह सही किया है। मुलायम सिंह यादव के चक्कर में शिवपाल को नहीं पड़ना चाहिए।

केशव प्रसाद मौर्या ने दिया बड़ा बयान-

केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि शिवपाल यादव ने अपनी कोई पार्टी बनाई है, तो वह बना सकते हैं और आप भी अपनी कोई पार्टी बनाना चाहे तो आप भी बना सकते हैं। अगर कोई भी राजनीतिक दल का नेता कोई पार्टी बना रहा है तो हमारी हमारी शुभकामनाएं इन सबके साथ हैं। बावजूद इसके उत्तर प्रदेश में कमल ही खिलेगा। अखिलेश यादव के लिए मेरा इतना ही कहना कि मैं कुछ दिन पहले समाचार पत्रों में देखा था कि मुलायम सिंह यादव, जिसने समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी, उन्होंने कहा था कि मेरा सम्मान नहीं हो रहा है। मतलब उनका अपमान हो रहा है, तो ऐसे अखिलेश यादव के लिए मैं जनता को बताना चाहूंगा कि जो अपने बाप का ना हुआ वह जनता का क्या होगा।

भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने भी साधा अखिलेश पर निशाना-

वहीं इस मामले में भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अखिलेश यादव पर पलटवार किया है। मनीष शुक्ला ने कहा कि अखिलेश के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। सीएम के तौर पर अखिलेश यादव को 2014 लोकसभा और 2017 विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार मिली थी। यही नहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर भी वह 2017 के नगर निगम और इस साल हुए कोआॅपरेटिव चुनाव भी हारे थे। उन्होंने आगे कहा कि अब अगर उनकी पार्टी सपा में इसका कोई विरोध कर रहा है, तो उसमें भाजपा का हाथ कैेसे हो सकता है? क्या समाजवादी पार्टी बीजेपी के इशारे पर चलती है?