13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लखनऊ हाईकोर्ट ने सैयद मोदी हत्याकांड में आरोपी को मिली उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

पप्पू की ओर से यह तर्क दिया गया कि एक बार मुख्य आरोपी के बरी हो जाने के बाद उसके खिलाफ सैयद मोदी को मारने का कोई मकसद नहीं रह गया

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Jun 30, 2022

लखनऊ हाईकोर्ट ने सैयद मोदी हत्याकांड में आरोपी को मिली उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

लखनऊ हाईकोर्ट ने सैयद मोदी हत्याकांड में आरोपी को मिली उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 1988 में राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियन सैयद मोदी की हत्या के मामले में दोषी पाए गए भगवती सिंह उर्फ पप्पू को मिली आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। पीठ ने कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत है कि सैयद मोदी अपीलकर्ता द्वारा एक अन्य आरोपी के साथ एक बन्दूक का उपयोग करते हुए गोलीबारी में मारे गए थे।


न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति सरोज यादव की पीठ ने बुधवार को फैसला सुनाया, जहां 21 मार्च, 2022 को दोषी पप्पू द्वारा दायर अपील की सुनवाई पूरी करने के बाद सुरक्षित रखा था। लखनऊ के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 22 अगस्त 2009 को पप्पू पर मुकदमा चलाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पप्पू अभी जेल में है।

पीठ ने कहा, "रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य से पता चलता है कि सह-आरोपी बलई सिंह की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी। उन्होंने एक गवाह की उपस्थिति में एक बयान दिया कि सैयद मोदी की हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल में दोषी पप्पू ने उसे कारतूस दिए थे।"

बाद में जांच टीम ने वारदात में प्रयुक्त हथियार को बरामद कर लिया। सैयद मोदी की 28 जुलाई, 1988 को दो कार सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।


सीबीआई ने जांच शुरू की और तत्कालीन कांग्रेस सांसद संजय सिंह, अमिता कुलकर्णी मोदी, अखिलेश सिंह, बलाई सिंह, अमर बहादुर सिंह, जितेंद्र सिंह उर्फ टिंकू और भगवती सिंह उर्फ पप्पू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पप्पू को छोड़कर अन्य सभी आरोपियों को या तो अदालतों ने बरी कर दिया या मुकदमे के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।


पप्पू की ओर से यह तर्क दिया गया कि एक बार मुख्य आरोपी के बरी हो जाने के बाद उसके खिलाफ सैयद मोदी को मारने का कोई मकसद नहीं रह गया और इसलिए उसे बरी कर दिया जाना चाहिए। यह मानते हुए कि पप्पू की पहचान करने वाला एक प्रत्यक्ष चश्मदीद था।