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National Security Law: यूपी में 8 महीनों में 139 अपराधियों पर हुई रासुका की कार्रवाई, जानें- क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

- उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त बनाये रखने के लिए इस वर्ष जनवरी से अब तक कुल 139 अभियुक्तों के खिलाफ National Security Law के तहत कार्रवाई की गई है

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Aug 19, 2020

National Security Law: यूपी में 8 महीनों में 139 अपराधियों पर हुई रासुका की कार्रवाई, जानें- क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

गोकशी के अपराध में 76, बालिकाओं के विरुद्ध अपराध में 6, गंभीर अपराध में 37, और अन्य अपराधों में 20 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई हुई है।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में इस वर्ष 139 अपराधियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। इनमें गोकश, नशे के सौदागर सहित अन्य जघन्य अपराधों में शामिल अपराधी हैं। पुलिस ने ऐसे सभी अपराधियों को चिन्हित कर रासुका (National Security Law) के तहत कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त बनाये रखने के लिए इस वर्ष जनवरी से अब तक कुल 139 अभियुक्तों के खिलाफ रासुका की कार्रवाई की गई है। इससे बड़े-बड़े शातिर अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं और सरकार के प्रति जनता का विश्‍वास और अधिक दृढ़ हुआ है। उन्होंने बताया कि गोकशी के अपराध में 76, बालिकाओं के विरुद्ध अपराध में 6, गंभीर अपराध में 37, और अन्य अपराधों में 20 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई हुई है।

क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून
रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित कानून है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 के तहत यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध नागरिक को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। सरकार को अगर लगता है कि कोई व्यक्ति उन्हें देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों को करने से रोक रहा है या कानून-व्यवस्था में बाधा पहुंचा रहा है तो संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिया जा सकता है। इस कानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है।

बिना आरोप के 12 महीनों तक जेल
रासुका के तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीनों तक जेल में रखा जा सकता है। साथ ही बिना आरोप तय किए उसे 10 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। हिरासत में लिया गया अभियुक्त उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है, लेकिन उसे मुकदमे के दौरान वकील की अनुमति नहीं है।

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