
Shardiya Navratri : माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से दूर करें यह रोग और जपे इस बीज मंत्र को होगा चमत्कार
लखनऊ , ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।। माता के जयकारों शुरू हुआ नवरात्री का पावन पर्व। पंडित पवन शास्त्री ने बतायाकि माता के इस रूप में एक अनोखी ही चमक होती हैं जिसे देखकर अलग सी ही अनुभूति होती हैं और माता का यह रूप बहुत ही तेज प्रदान करने वाला होता हैं।
उन्होंने बतायाकि नौ दुर्गा में माँ ब्रह्मचारिणी दूसरे रूप में जानी जाती हैं। " ब्रह्मा " शब्द उनके लिए लिया जाता है जो कठोर भक्ति करते है और अपने दिमाग और दिल को संतुलन में रख कर भगवान को खुश करते है । यहाँ ब्रह्मा का अर्थ है "तप" । माँ ब्रह्मचारिणी की मूर्ति बहुत ही सुन्दर है। उनके दाहिने हाथ में गुलाब और बाएं हाथ में पवित्र पानी के बर्तन ( कमंडल ) है। वह पूर्ण उत्साह से भरी हुई है ।
तपस्या क्यों की उसपर एक अद्भुत कहानी है।
पंडित पवन शास्त्री ने कहाकि पार्वती हिमवान की बेटी थी। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ खेल में व्यस्त थी नारद मुनि उनके पास आये और भविष्यवाणी की "तुम्हरी शादी एक नग्न भयानक भोलेनाथ से होगी और उन्होंने उसे सती की कहानी भी सुनाई। नारद मुनि ने उनसे यह भी कहा उन्हें भोलेनाथ के लिए कठोर तपस्या भी करनी पढ़ेगी। उन्होंने कहाकि इसीलिए माँ पार्वती ने अपनी माँ मेनका से कहा की वह शम्भू (भोलेनाथ ) से ही शादी करेगी नहीं तो वह अविवाहित रहेगी। यह बोलकर वह जंगल में तपस्या निरीक्षण करने के लिए चली गयी। इसीलिए उन्हें तपचारिणी ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। माता के इस रूप की पूजा -अर्चना करने से भक्त के अंदर संतुलन बना रहता हैं और बड़े से बड़े फैसले करने में सहायता मिलती हैं।
Navratri में माता की पूजा आयुर्वेदिक उपचार भी हैं जाने
माँ ब्रह्मचारिणी - ( ब्राह्मी ) = ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर रक्त विकारो को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है इसलिए इसे सरस्वती भी कहाँ जाता है।
पृथक बीज मंत्र का करें जप 108
ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
Published on:
30 Sept 2019 07:00 am
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