दुधवा के पूर्व निदेशक संजय सिंह ने बताया कि नेपाली हाथियों का कुनबा दुधवा के जंगल में लगातार बढ़ रहा है। एक समय था जब जंगल में इक्का-दुक्का हाथी नज़र आते थे। मगर अब इनकी संख्या 60 के पार पहुंच चुकी है। हम लगातार इनकी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल के जंगल कटे बेघर हुए हाथी
संयज सिंह ने बताया कि नेपाल का जंगल लगातार कई वर्षों से कटता जा रहा है। उनके पास अब जंगल नहीं बचा। ऐसे में नेपाल सीमा से सटा दुधवा का जंगल इन हाथियों के लिए शरणगाह बन चुका है। इन्हें यहां पानी-खाना सब मिल रहा है तो अब उन्होंने अपना यहीं पर ठिकाना बना लिया है। हाथियों के झुंड में इन दिनों 16 बच्चे हैं।
अपने जन्म स्थान पर जाना नहीं भूलते
संजय सिंह ने बताया कि हाथी का जहां जन्म होता है, वहां पर वह वापस जरूर जाते हैं। ऐसा ही नेपाल से आए हाथियों का भी है। हाथियों के परिवार महीने में कई बार नेपाल तक पहुंचते हैं। मगर वहां पर हर बार उन्हें निराशा मिलती है। वहां न तो जंगल बचे हैं न ही उनके लिए खाना। जब वह नेपाल जाते हैं तो वहां थारू जनजातियों के खेत में खाने घुस जाते हैं। ऐसे में वहां के लोग इनको मारकर भगाते हैं। इससे यह हाथी वापस फिर लौट आते हैं।