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दुधवा के हाथियों की दिलचस्प कहानी, नेपालियों से क्या है रिश्ता

नेपाल में इंसान के साथ वह वनजीव भी परेशान हैं

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Santoshi Das

Nov 16, 2016

Dudhwa National Park

Dudhwa National Park

लखनऊ.नेपाल में इंसान के साथ वह वनजीव भी परेशान हैं। हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि जंगल काटे जा रहे हैं। जंगल में वन्यजीवों को खाने को कुछ नहीं मिल रहा। नदी सूख रही तो पीने के पानी को भी वन्यजीव तरस रहे। ऐसे में नेपाल के जंगल में रहने वाले हाथियों ने अपना ठिकाना बदल लिया है। अब नेपाली हाथियों का झुंड ने दुधवा नेशनल पार्क को अपना नया ठिकाना बना लिया है। यहां इन्हें खाने के साथ पीने का भरपूर पानी मिल रहा है। ऐसे में इस साल दुधवा आने वाले पर्यटकों को जंगल में नेपाली हाथियों का झुण्ड देखने का मौका मिलेगा। इससे पर्यटक बेहद खुश लग रहे हैं।


दुधवा के पूर्व निदेशक संजय सिंह ने बताया कि नेपाली हाथियों का कुनबा दुधवा के जंगल में लगातार बढ़ रहा है। एक समय था जब जंगल में इक्का-दुक्का हाथी नज़र आते थे। मगर अब इनकी संख्या 60 के पार पहुंच चुकी है। हम लगातार इनकी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

नेपाल के जंगल कटे बेघर हुए हाथी
संयज सिंह ने बताया कि नेपाल का जंगल लगातार कई वर्षों से कटता जा रहा है। उनके पास अब जंगल नहीं बचा। ऐसे में नेपाल सीमा से सटा दुधवा का जंगल इन हाथियों के लिए शरणगाह बन चुका है। इन्हें यहां पानी-खाना सब मिल रहा है तो अब उन्होंने अपना यहीं पर ठिकाना बना लिया है। हाथियों के झुंड में इन दिनों 16 बच्चे हैं।

अपने जन्म स्थान पर जाना नहीं भूलते

संजय सिंह ने बताया कि हाथी का जहां जन्म होता है, वहां पर वह वापस जरूर जाते हैं। ऐसा ही नेपाल से आए हाथियों का भी है। हाथियों के परिवार महीने में कई बार नेपाल तक पहुंचते हैं। मगर वहां पर हर बार उन्हें निराशा मिलती है। वहां न तो जंगल बचे हैं न ही उनके लिए खाना। जब वह नेपाल जाते हैं तो वहां थारू जनजातियों के खेत में खाने घुस जाते हैं। ऐसे में वहां के लोग इनको मारकर भगाते हैं। इससे यह हाथी वापस फिर लौट आते हैं।

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