लखनऊ.मैगी में हानिकारक रसायन मिलने से एक बार फिर मैगी की बिक्री पर संकट गहराने वाला है। बाराबंकी के बाद मैगी के नमूने लखनऊ से लिए जा रहे हैं। मैगी से होने वाले नुकसान को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है वह थम नहीं रहा। कई बार जांच में मैगी फेल हो चुकी है। चिकित्सकों की माने तो मैदे से बनी मैगी खून की कमी के साथ ही बच्चों को कई तरह की बिमारियों में धकेल रहा है।
बलरामपुर हॉस्पिटल के डॉक्टर हिमांशु ने बताया की बचपन में छुट्टी के दिन जब हम लोग मम्मी से मैगी खाने के लिए कहते थे, तो वह हमेशा कहा करती थी, 'इसमें मैदा होता है, इसे खाने से बदहजमी की परेशानी होती है।' क्योंकि सभी नूडल्स मैदे से बनाए जाते हैं, इसलिए लोग मानते थे कि एक कटोरी मैदा नूडल्स का मतलब आंतों की परेशानी और मोटापे को बढ़ाना है। मगर आज मैगी का ट्रेंड इतना बढ़ गया है की मां बच्चों को स्कूल लंच में इसे खुद ही बना कर देती हैं। आसानी से बनने वाले मैगी को खाने से कई तरह की शारीरिक समस्या होती हैं। मैगी मैदा से बनी होती है जो की सबसे खतरनाक बात है। भले ही इसके नमूने टेस्ट में फेल हुए लेकिन मैदा तो पेट को नुकसान ही पहुंचाता है।
वर्ल्ड इंस्टेंट नूडल्स एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित खबर के अनुसार, भारत ग्लोबल इंस्टेंट नूडल्स के सेवन करने के मामले में चौथे स्थान पर है। यहां हर साल 5.5 बिलियन पैकेट बेचे जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, इस मामाले में चीन पहले नंबर पर है, जहां हर साल 44.4 बिलियन पैकेट बेचे जाते हैं। केवल इन्हीं आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि दो मिनट में बनने वाले नूडल्स का ज़्यादा इस्तेमाल करना आपकी सेहत के लिए कितना हानिकारक हो सकता है।
सेहत के लिए नुकसानदायक
कई सालों से बाजार में मिलने वाले यह नूडल्स घरों में तो बहुत ही आसानी से मिल जाते थे, साथ ही ढ़ाबे और नुक्कड़ पर मौजूद हर दुकान में आसानी से दिख जाते थे, लेकिन यह काफी प्रोसेस्ड फूड है।
इसमें पोषक तत्व तो कम होते ही हैं, साथ ही फैट, सोडियम और कैलोरीज की मात्रा भी अधिक होती है और सिर्फ यही नहीं, इसमें प्रिजर्वेटिव्स, तरह-तरह के बनावटी रंग, स्वाद और योगात्मक चीजें मौजूद होती हैं।
डॉ. सुनील शर्मा के मुताबिक, 'अगर हम मोनोसोडियम ग्लूटामेट और टर्शयरी-ब्यूटाइल हाइड्रोक्विनोन (टी. बी. एच. क्यू) की बात करें, तो यह पेट्रोलियम इंडस्ट्री में उत्पन्न होने वाले ऐसे रसायन हैं, जो शायद इंस्टेंट नूडल्स के स्वाद और कई समय तक बचाकर रखने में मदद करते हैं।
दो मिनट वाली मैगी से मैटाबॉलिज्म को खतरे में
साउथ कोरियन द्वारा संचालित जांच के मुताबिक, कैसे इंस्टेंट नूडल्स मानव शरीर पर प्रभाव करता है? इस विषय पर पिछले साल, ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने एक रिपोर्ट निकाली थी। इस पर ह्यून शिन, हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और अध्ययन के सह-लेखक ने बताया कि 'इंस्टेंट नूडल्स खाने में आसान और बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन इनका सेवन करना मतलब खुद के मैटाबॉलिज्म को खतरे में डालना है। इनमें जहां एक तरफ सोडियम की मात्रा काफी ज़्यादा होती है, वहीं दूसरी ओर इसमें अस्वास्थ्य सैचुरेटिड फैट और ग्लाइसेमिक भार भी अधिक होता है।'
'द वॉशिंगटन पोस्ट' में प्रकाशित सूचना के मुताबिक, इंस्टेंट नूडल्स कम या बिल्कुल न के बराबर खाने वाली औरतों की तुलना में हफ्ते में एक या दो बार खाने वाली औरतों में काफी फर्क होता है। दोनों के ही शरीर का मैटाबॉलिज्म रेट अलग तरह से काम करता है। बावजूद इसके कि या तो उनका आहार एकदम सादा होता है या फिर वे ज़्यादा फास्ट फूड खाने के वर्ग में आती हैं।
इसके अलावा, नूडल्स को अपने खाने में अधिक इस्तेमाल करना मतलब मोटापा, मैटाबॉलिक बीमारी जैसे डायबटीज, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों को बुलावा देना है।
किससे बनी है ये नूडल्स?
कई इंस्टेंट नूडल्स मैदे से बनी होती हैं, जो आटे का चिकना, शुद्ध और फीका रूप होता है। हमारी सेहत के लिए मैदे को क्यों इतना हानिकारक बताया गया है? वह इसलिए क्योंकि यह अत्यधिक परिवर्तित आहार होता है, जो स्वाद में मजेदार तो होता है, लेकिन पोषक तत्वों से खाली होता है।
मोटापा बढ़ाता है मैगी
डॉ. सिमरन सैनी, पेशे से न्यूट्रीशनिस्ट का कहना है, 'मैदे से बने ये इंस्टेंट नूडल्स प्रिजर्वेटिव से भरे होते हैं, जो कि हर तरह के पोषक तत्व से निकली हुई केवल कैलरीज होती है। इनका ज़्यादा इस्तेमाल करना मतलब मोटापे को शरीर में बढ़ाना है। कई स्थिति में तो यह इंस्टेंट नूडल्स हमारी पाचन क्रिया पर भी काफी असर डालते हैं। साथ ही इनके कुछ टुकड़े शरीर के अपेंडिक्स पर प्रभाव डालकर इंफेक्शन के होने का कारण बन सकते हैं।
खराब चिकनाई
तरह-तरह के परिवर्तित खाने में फैट जैसे सैचुरेटिड फैट या ट्रांस फैट इतना अच्छा नहीं होता। लेकिन, वहीं मोनोअनसैचुरेटिड फैटी एसिड और पॉलीअनसैचुरेटिड फैटी एसिड आपकी सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। खाद्य लेबल को अगर गहराई से जाकर देखा जाए, तो इसमें लिखे वेजिटेबल ऑइल, चीनी, चाशनी, स्वाद बढ़ाने वाले कई तरह के पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
मैगी को पचाने में लग जाता है कई घंटे
2013 में स्थानीय अमेरिकन डॉक्टर द्वारा किए गए एक्सपेरिमेंट में उन्होंने यह पता लगाने की कोशिश की कि 'जब हम इंस्टेंट नूडल्स खाते हैं, तो हमारे शरीर में उस दौरान पाचक प्रक्रिया कैसे होती है? एक माइक्रो, गोली के आकार के कैमरे की मदद से उन्होंने नूडल्स के मंथन की प्रक्रिया को कंप्यूटर की स्क्रीन पर देखा। देखने पर पता लगा कि ताजा बनी नूडल्स से करीब एक घंटा ज़्यादा इन इंस्टेंट नूडल्स को पचाने में लगता है।
मैगी से नुक्सान
खून की कमी
जोड़ों की समस्या सीखने की क्षमता पर असर
मेमोरी लॉस
किडनी को नुकसान
न्यूरोलॉजी डिसऑर्डर
किसी चीज़ पर ज्यादा देर तक ध्यान ना दे पाना
लेड से होने वाला नुक्सान काफी सालों के बाद दिखाता है
मैगी विवाद का यह है मामला
अपनी क्वालिटी को लेकर पहले भी सवालों से घिर चुकी नेस्ले मैगी एक बार फिर ताजा जांच में फेल हो गयी है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिले में एक अभियान के तहत गत पांच फरवरी को बाराबंकी के सफेदाबाद कस्बे में एक किराने की दुकान से मैगी नूडल्स के नमूने उठाए थे। उन्होंने बताया कि जांच में नमूने मापदंड के विपरीत पाये गये हैं।
यह हैं नियम
नियमों के मुताबिक मैगी मसाले की राख की मात्रा एक प्रतिशत होनी चाहिए मगर जांच में यह मात्रा इसके ऊपर जाकर 1.85 प्रतिशत पायी मली है। यह रिपोर्ट लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में जांच के बाद पिछले महीने 26 फरवरी को जारी की गई है। मनोज के अनुसार अब संबंधित विक्रेता और नेस्ले कम्पनी को नोटिस भेजा जाएगा।
क्यों बैन हटा मैगी से
नेस्ले की मैगी से हटने के बाद पूरे देश में मैगी फिर से धड़ल्ले से बिकने लगी।कंपनी विज्ञापनों के जरिये मैगी में मिलावट ना होने का भरोसा भी देने लगी। मगर एक बार फिर मैगी नियम के अनुसार ना बनाई जाने पर यह बाजार से गायब हो सकती है।