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UP Nikay Chunav 2023: उम्मीदवारों के चयन के लिए बनाया गया प्लान, भाजपा में संगठन तो सपा में अखिलेश लेंगे फैसला

Nikay Chunav 2023: निकाय चुनाव में अपनी अपनी पार्टियों को जीताने के लिए सपा और भजपा ने प्रत्याशियों को लेकर नियम बनाए है।

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लखनऊ

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Prashant Tiwari

Apr 11, 2023

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दांए CM योगाी बांए अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का ऐलान होते ही सभी पार्टियां उम्मीदवारों के सिलेक्शन में जुट गई हैं। निकाय चुनाव में लड़ाई भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच हैं। भाजपा जहां निकाय चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट जीत कर प्रदेश की विपक्षी पार्टियों पर मानसीक दबाव बनाना चाहती है। वहीं, सपा इस चुनाव में किसी भी हाल में भाजपा को हराना चाहती है। निकाय चुनाव में अपनी अपनी पार्टियों को जीताने के लिए दोनों दलों ने प्रत्याशियों को लेकर नियम बनाए हैं, आइए जानते हैं वह नियम क्या है?

पैनल करता है नाम की सिफारिश
BJP में प्रत्याशी चयन की एक प्रक्रिया है। प्रत्याशियों के नाम नीचे से भेजे जाते हैं और फिर प्रदेश स्तर पर उन नामों पर चर्चा करके उम्मीदवार घोषित किए जाते हैं। BJP ने मेयर कैंडिडेट चुनने के लिए सभी 17 नगर निगमों में सरकार के मंत्रियों को प्रभारी बनाया है। पार्टी संगठन से भी एक एक व्यक्ति को उन नगर निगमों में प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा जो महानगर अध्यक्ष जिला अध्यक्ष और उस शहर के सारे विधायक, विधान परिषद के सदस्य, सांसद राज्यसभा के सांसद, जिले के महामंत्री जिले की कमेटी है।

ये कमेटी तीन-तीन नामों का एक पैनल तैयार करती है और उसे प्रदेश नेतृत्व को भेजती है, जिसके बाद मेयर के लिए उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा होती है। बीजेपी कोर कमेटी जिसमें मुख्यमंत्री दोनों उपमुख्यमंत्री प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन शामिल है, वो लोग जो तीन-तीन नामों का पैनल आया है उस पर चर्चा करते है। उनमें से जिस नाम पर सभी एक साथ सहमत होते है उस नाम को शीर्ष नेतृत्व को भेजा जाता है।

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सपा ने शहरों में तैनात किए आब्जर्वर
समाजवादी पार्टी ने मेयर पद के उम्मीदवार को चुनने के लिए इस बार अलग व्यवस्था की है. पार्टी ने नगर निगम के चुनाव के लिए ऑब्ज़र्वर बीते वर्ष अगस्त महीने में ही घोषित कर दिए थे। इसमें पार्टी के विधायक सांसद पूर्व विधायक शामिल है। ये आब्जर्वर अलग-अलग शहरों में तैनात किए गए हैं। ये वह उस शहर के जो विधायक हैं, जो नगर की कमेटी है, जिला अध्यक्ष है, अगर वहां कोई पार्टी का सांसद है, हारे हुए विधानसभा के उम्मीदवार और हारे हुए लोकसभा के उम्मीदवार, वहां के सेक्टर प्रभारी इन लोगों के साथ बैठक करके, आब्जर्वर आवेदन करने वाले नामों पर चर्चा करेंगे और दो-तीन या फिर अधिकतम 4-5 नामों का पैनल तैयार कर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजेंगे। नगर निगम में मेयर पद का उम्मीदवार कौन होगा इसका आखिरी फैसला अखिलेश यादव ही करेंगे।