
Now Indian Railways train accidents will be less in India when temperature rises coach will be damaged
ट्रेन के चक्कों में हॉट एक्सल की होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेल प्रशासन ने दिल्ली, मुंबई, हावड़ा, लखनऊ रूटों से आने वाली रेलगाड़ियों की चेकिंग के लिए आधुनिक मशीनें टीएक्सआर स्टाफ को मुहैया कराई हैं। एक्सल बॉक्स का तापमान 70 से 90 डिग्री हुआ तो ट्रेनों को निश्चित दूरी तक कॉशन यानी कि तय की गई गति से चलाया जाएगा। 90 डिग्री से अधिक तापमान पर ट्रेन का कोच डैमेज कर दिया जाएगा ताकि रास्ते में कोई दुर्घटना न हो। इसके लिए हर ट्रेन की नियमित चेकिंग का निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। एनसीआर में वैसे भी साल में 200 से 225 तक हाट एक्सल की घटनाएं होती हैं। एक सेंट्रल स्टेशन पर साल में औसतन 16-18 कोच डैमेज किए जाते हैं।
एक स्टेशन पर 10-30 एक्सल बाक्श तापमापी संयंत्र स्टाफ को मुहैया करा दिए गए हैं। हर प्लेटफार्म पर दो-दो कर्मचारी मशीनों के साथ उपलब्ध रहते हैं। पांच मिनट के भीतर पूरे कोचों का तापमान मापते हैं। इनकी रिपोर्ट ओके होने पर ही ट्रेन की लाइन क्लीयर होती है। स्टाफ ने किसी कोच के एक्सल बॉक्स का तापमान तय मानक से अधिक बताया तो उसी के हिसाब से फैसला मैकेनिकल विभाग लेता है।
मौसम में उतार-चढ़ाव पर हाट एक्सल की बढ़ती हैं घटना-दुर्घटना
सर्दी से गर्मी, बरसात से सर्दी और गर्मी से बारिश के मौसम के बदलाव पर हॉट एक्सल की घटनाएं बढ़ती हैं। उमस औऱ गर्मी में 70 फीसदी हॉट एक्सल की घटनाएं होती हैं। मौसम के बदलाव या फिर मानक से अधिक उमस औऱ गर्मी होने पर हॉट एक्सल की घटनाएं न हो, इसके लिए कोचों के एक्सल बॉक्स की जांच कराई जाती है।
मालगाड़ियों को विशेष एस्कॉर्ट से चलाना मजबूरी
यात्री कोचों को डैमेज करने में कोई विशेष दिक्कत नहीं होती है लेकिन मालगाड़ियों का वैंगन काटने में बड़ी समस्या आती है। इस स्थित में मैकेनिकल स्टाफ को ट्रेन में भेज एस्कॉर्ट कराया जाता है। इसके साथ ही ट्रेन की गति भी तय कर दी जाती है। इसके अलावा या फिर मालगाड़ी को लूपलाइन में खड़ा करके एक्सल बाक्स को ठंडा किया जाता है।
Updated on:
14 Aug 2022 11:31 am
Published on:
14 Aug 2022 11:30 am
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