
CAA
लखनऊ. आसाम से शुरू हुआ नागरिकता कानून का विरोध दिल्ली होते हुए अब यूपी में फैल चुका है। हालांकि कांग्रेस समेत विरोधी दल भले ही इस बात का दावा करें कि पूरा देश इसका विरोध कर रहा है, मगर सच्चाई तो यह है कि कुछ गिनी-चुनी संस्थाएं और एक समुदाय विशेष से जुड़े लोग इसका ज्यादा विरोध कर रहे हैं। यूपी में इस कानून का विरोध तत्काल तो नहीं हुआ मगर दिल्ली के जामिया मिलिया में हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध की आड़ में यहां बवाल शुरू हुआ। जो पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और फिल लखनऊ के नदवा कॉलेज से होते हुए मऊ तक पहुंच गया। अभी योगी सरकार, प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ हुई हिंसा से जूझ ही रही थी कि इन घटनाओं ने यूपी की कानून-व्यवस्था में कोढ़ में खाज का काम कर दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर प्रदेश के सभी जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों की क्लास लगा दी। फिलहाल शुरुआती उपद्रव के बाद से पूरे प्रदेश में हालात काबू में हैं।
वर्ष 2017 में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी की सत्ता संभाली थी तो पिछली सरकार के मुकाबले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ था। मगर पिछले एक साल में, राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों में अपराध के ग्राफ में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, खास तौर पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध में बढ़ोतरी ने स्थिति को बद से बदतर बना दिया।
फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट-
हालांकि महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा के मामले में तेजी से न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 218 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन अदालतों में केवल बलात्कार और यौन अपराध से सम्बन्धित मामलों की सुनवाई होगी। इनमें 74 केवल पोक्सो एक्ट के लिए और 144 महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए हैं। 9 दिसम्बर को इसे हरी झंडी मिली और सरकार ने तेजी दिखाते हुए तुरंत 218 अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति भी कर दी।
पिछली सरकारों की स्थिति-
ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश में क्राइम के ग्राफ में ये बढ़ोतरी पहली बार हुई हो। इसके पहले की सरकारों में भी ऐसा होता रहा है। बसपा सरकार के लिए नासूर बन चुके एनएचआरएम घोटाले में जिस तरीके से ताबड़तोड़ हत्याएं हुई थीं, उन्हें भूला नहीं जा सकता। जिसमें दो सीएमओ को दिनदहाड़े गोली मार दी गयी वहीं एक की जेल में ही हत्या कर दी गयी। इसके अलावा सपा सरकार में हुए सांप्रदायिक दंगों को कौन भूल सकता है। आलम ये था कि प्रदेश की बदहाल कानून व्यवस्था ही अखिलेश सरकार की हार की वजह बनी।
अयोध्या फैसले को दौरान सरकार ने उठाया सही कदम-
नवम्बर में अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद जिस तरीके से प्रदेश में कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रही, उसकी बेहद सराहना हुई। राज्य सरकार द्वारा एहतियातन उठाए गये कदमों से हालात एकदम काबू में रहे। हालांकि इस मामले में राजनीतिक दलों के साथ सभी समुदाय के लोगों ने भी समझदारी से काम लिया।
Updated on:
17 Dec 2019 09:26 pm
Published on:
17 Dec 2019 09:26 pm
