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एनटीपीसी ऊंचाहार की कांड की जांच में अधिकारी दोषी !

दुर्घटना वाली यूनिट में उस समय उत्पादन कर दिया था 200 मेगावाट  

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लखनऊ

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Anil Ankur

Nov 13, 2017

ntpc kand

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रायबरेली/ लखनऊ। रायबरेली के ऊंचाहार एनटीपीसी में हुये हादसे के बाद से जांच कर रही दो टीमों ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। जांच दल में प्रथम दृष्टया में एनटीपीसी के अधिकारियों के बेजा दबाव को दोषी करार दिया है। अब जांच के लिए तीसरी टीम मंगलवार तक यहां पहुंचने की संभावना है। यह टीम भी अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर शासन को सौंप देगी।

पाइप में चिपके कणों ने चोक किया था ब्ॉयलर
घटना के बाद शासन ने जांच के लिए तीन टीमों का अलग अलग गठन किया था। तीन स्तर से बॉयलर में विस्फोट की जाँच की जा रही है। दो टीमों ने दिल्ली से आकर पड़ताल की है। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर मजिस्ट्री जाँच की जा रही है। एनटीपीसी सूत्रों का कहना है कि जांच टीम ने पाया है कि चलती यूनिट में क्लिंकर की सफाई के दौरान हाइपर यानी की पाइप चोक हो गया था। पाइप चोक होने और बॉयलर में दबाव बढऩे से विस्फोट होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि खराब कोयला आने की वजह से राख और पत्थर के कण गरम होकर ब्यॉलर के फर्नेस में चिपक गए थे और उसके कारण राख बाहर नहीं आ पा रही थी। यही कारण है कि जब राख बाहर नहीं आ पाई तो ऐसी स्थिति में विस्फोट होना स्वाभाविक था।

उत्पादन बनाए रखने के लिए हुई घटना
जांच दल के सूत्रों का कहना है कि कोयला कम आता देखा अधिकारियों ने 500 मेगावाट उत्पादन कर रही यूनिट को घटाकर 200 मेगावाट उत्पादन पर चालू रखा गया। इस बीच यूनिट ट्रिप होने की आशंका दिखी तो बॉयलर का तापमान बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने बायलर में आयल गन से तेल का छिड़काव शुरू कर दिया और उसके बाद फर्नेस में चिपके क्लिंकर की सफाई शुरु कर दी गई। यह भी जांच में पाया गया कि सफाई से किलंकर के टुकडे पाइप में जाकर फंस गए थे जिसके कारण वह चोक हो गया था। नतीजा यह हुआ कि पाईप पानी की सील तोड़कर फट गया और यह हादसा हो गया।

जांच टीम बयानों को मोबाइल कर रही है रिकॉर्डं
रायबरेली के हादसे को लेकर दो स्तरीय टीमों ने यहां आकर धमाके वाली यूनिट की जांच की गई और दिल्ली लौट गयी। एक टीम एक हफ्ते तक यहां रुकने के बाद जांच की तो दूसरी जांच टीम दो दिन ंचाहार में रहने के बाद शनिवार को वापस चली गई। जांच टीम ने लोगों के बयान और घटना स्थल को अपने अपने मोबाइल फोन पर रिकार्ड किया। जांच दलों ने ज्यादातर समय यूनिट 6 नंबर या फिर पूछताछ में गुजारा।

अधिकारियों का बेवहज दबाव बना कारण
दोनों जांच दलों की रिपोर्ट पर सूत्र कहते हैं कि एनटीपीसी अधिकारियों को बेवजह का दबाव इस बात का द्योतक है कि वह तमाम खामियों को छिपाकर अपने मुख्यालय में अच्छी तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि यहां के हालात अच्छे नहीं थे। खामियों को अधिकारियों ने नजरंदाज किया। जिसके कारण यह घटना हुई। जांच दल ने एनटीपीसी के अधिकारियों, इंजीनियरों और मजदूरों से अलग अलग बात की। तमाम लोगों से बात करने के बाद जो रिपोर्ट उन्होंने तैयार की है वह निश्चितरूप से अफसरों को संकट में डालने वाली है।

क्या कहता है एनटीपसी प्रशासन
एनटीपीसी में हुए हादसे को को अपनी जांच चल रही है जांच के बाद ही घटना की सच्चाई का पता चल पाएगा। जांच दल अपनी रिपोर्ट मुख्यालय और जांच एजेंसी के मुखिया को सौंपेगा- ए के श्रीवास्तव, पीआरओ- एनटीपीसी