
लखनऊ. भाजपा के लिए उनके अपने ही मुसिबतें खड़ी कर रहे हैं। जिसका खामियाजा आने वाले चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर अपनी ही सरकार की किरकिर कराने में लगे हैं। वे योगी सरकार पर ही लगातार हमला बोल रहे हैं। वहीं बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले भी अपनी ही सरकार के खिलाफ बुगुल फूंक दिया है। उधर अपना दल की अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी सरकार के सामने यह कह कर मुश्किलें पैदा कर रही हैं कि थानों में पोस्टिंग में ओबीसी वर्ग के लोगों को उचित स्थान दिया जाए। ऐसे में भाजपा को अखिलेश और मायावती से लडऩे से पहले अपनों से ही जूझना पड़ेगा।
भाजपा ने कर्नाटक में भी अपनी सरकार बना ली अब उसका अगला पड़ाव यूपी है। अब पार्टी की निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं। यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। 2014 के चुनाव भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने ७३ सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन अब यूपी की राजनीति में काफी कुछ बदल गया है। अब सपा-बसपा ने गठबंधन कर लिया है। वह लोकसभा 2019 का चुनाव एक साथ लड़ेंगे। वहीं भाजपा में कई दलित सांसद पार्टी की ही नीतियों से खफा हैं। बहराइच की सांसद सावित्री बाई फुले तो खुलकर अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़ी हो गई हैं। उन्होंनें 20 मई को लखनऊ में एक रैली करने का भी एलान किया है।
नहीं मानते किसी की
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। वे आपनी सरकार पर निशाना साधते हैं। पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि योगी का हाल भी अखिलेश और मायावती की तरह होगा। राजभर ने कुछ दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की उसके बाद भी उनके बोल नहीं बदले। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जब उनके ऊपर कार्रवाई की बात की तो उनका जवाब था कि वे किसी कार्रवाई से नहीं डरते वे दलितों और पिछड़ों की आवाज उठाते रहेंगे। वहीं कई सांसद भी दलितों के पक्ष में आवाज उठाते रहे हैं।
खड़ी कर सकते हैं दिक्कतें
यहां सबसे बड़ी बात यह है कि अगले साल लोकसभा का चुनाव होना है। ऐसे में भाजपा के सामने अब अबने ही नेताओं पर लगाम लगाने की एक बड़ी चुनौती है। वहीं विरोध दल भी इन नेताओं को हवा देने में लगे हैं जो अपनी ही पार्टी के विरोध में खड़े हो रहे हैं।
उप चुनाव के बाद हो सकती है कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पिछले दिनों कार्रवाई के संकेत दिए थे। माना जा रहा है कि कैराना और नूरपुर उप चुनाव के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर कार्रवाई होगी। अब यह देखना होगा कि आगे पार्टी क्या करते है। पार्टी का इन विरोधियों के खिलाफ क्या रूख रहता है, लेकिन इतना तो तय है कि इन नेताओं के विरोध से भाजपा के लिए दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
Published on:
17 May 2018 02:29 pm
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