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राजभर की शिवपाल से मुलाकात के बाद यूपी में सियासी परा चढ़ा

ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वैसे तो वे अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं

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Om Prakash Rajbhar and ShivpalYadav

राजभर की शिवपाल से मुलाकात के बाद यूपी में सियासी परा चढ़ा

लखनऊ. योगी के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की शिवपाल यादव से मुलाकात के बाद यूपी के सियासी गलियारों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह मुलाकात पूर्वांचल के राजनीति में काफी कुछ बदल सकती है। ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वैसे तो वे अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार वे अपने बयान को लेकर चर्चा में नहीं हैं बल्कि योगी के सबसे विरोधी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव से मुलाकात को लेकर चर्चा में हैं।

बतादें कि ओम प्रकाश राजभर का पूर्वांचल के कुछ जिलों में खासा प्रभाव है, वे जिस जाति विरादरी से आते हैं उसकी कई जिलों में अच्छी खासी संख्या है। अगर वे सपा-बसपा गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो निश्चित तौर पर भाजपा को वे पूर्वांचल के कई जिलों में नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं राजभर भाजपा के कुछ असंतुष्ट नेताओं को भी अपनी ओर खींच सकते हैं।

सूत्रों की मानें तो ओम प्रकाश राजभर लोकसभा चुनाव में पांच से दस सीटें भाजपा से चाहते हैं, लेकिन इसकी संभावना कम ही है कि भाजपा उन्हें इतनी सीटें दे। ऐसे में शिवपाल यादव से उनकी मुलाकात के यही मायने निकाले जा सकते हैं कि कहीं वे सपा-बसपा गठबंधन का हिस्सा तो नहीं बनने वाले हैं। राजनीति में कब क्या हो जाए यह कहना मुश्किल है। वैसे भी राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता जब जिसको जहां मौका मिल जाए वह वहीं अपना ठिकाना तलाश लेता है। २०१९ में लोकसभा का चुनाव होने वाला है सभी पार्टियां अपने जीत के लिए प्रयास कर रही हैं।

...तो इसलिए अपने ही सरकार पर बोल रहे हैं हमला

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर अक्सर अपने ही सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। वे अक्सर सीएम योगी पर भी टिप्पणी करते रहते हैं। अब उनकी शिवपाल से मुलाकात के बाद यूपी की राजनीति का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। सपा और बसपा की यही कोशिश है कि भाजपा को 2019 में पराजित किया जा सके।

मुश्किलें और बढ़ जाएंगी

अगर राजभर भी गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो जाहिर है उनको भी फायदा मिलेगा और हो सकता है कि गठबंधन में उन्हें कुछ सीटें लोकसभा के लिए दी जाएं। अगर ऐसा होता है तो भाजपा के लिए पूर्वांचल में मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। जिस तरह से गोरखपुर, फूलपुर उप चुनाव में भाजपा की पराजय हुई है उससे तो यही लगाता है कि सपा और बसपा गठबंधन भाजपा को मात देने में उनके सहयोगियों पर भी अपनी नजरें गड़ाए है।