एक वरिष्ठ ईओडब्ल्यू अधिकारी ने कहा, "लखनऊ की एक निजी कंपनी को राज्य के 26 जिलों में स्कूल बनाने का ठेका मिला था। इस परियोजना की लागत 36 लाख रुपये प्रति स्कूल थी। बिजनौर को 13 स्कूल आवंटित किए गए और निर्माण की समय सीमा 2010 थी। हालांकि, कंपनी ने केवल कुछ ही निर्माण किए। कथित तौर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से, इमारतों और परियोजना निधि के लगभग 90 प्रतिशत के साथ छेड़छाड़ की गई।"