
#GST का एक साल, छोटे कारोबारियों के हिस्से आया बड़ा नुकसान, तो चक्रव्यूह में फंसी आम जनता
लखनऊ. एक साल पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने करप्शन रोकने के लिए जीएसटी लागू किया था। जिसका विरोध पूरे देश के व्यापारियों ने किया। व्यापारियों का आरोप था कि मोदी सरकार ने इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। व्यापारी आए दिन जीएसटी की जटिलता को लेकर जीएसटी भवन के चक्कर लगाते रहे। कभी पोर्टल खराब मिला तो कभी इसकी जटिलता के चक्रव्यूह में व्यापारी फंसते रहे। व्यापारी नेताओं का कहना है कि जीएसटी के लागू होने से पूरे यूपी में पांच हजार से ज्यादा छोटे कारखानों और फैक्ट्रियों में ताले पड़ गए। व्यापारी ने अपने-अपने कारोबार को छोड़कर नौकरी करने को मजबूर हो गए। वहीं ग्राहकों का कहना है कि उन्हें जीएसटी से फायदे के बजाय नुकसान ज्यादा उठाना पड़ा। दुकानदार ओरिजनल की जगह फर्जी रसीद देकर पूराने दामों पर सामानों की बिक्री कर रहे हैं।
क्या है जीएसटी ?
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं। जीएसटी लागू होने के बाद हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगने लगने के साथ ही यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स व्यापारियों को देना होता है। जीएसटी के जानकार बताते हैं संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगाती हैं। अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम हो गई है।
कुछ इस तरह से काम करता है जीएसटी
जीएसटी के जानकार रोहित ने बताया कि जीएसटी में तीन अंग हैं। केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी। केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करती हैं। रोहित बताते हैं कि जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को हुआ है। पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होता है। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। जैसे पहले कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते थे तो उसकी कीमत अलग होती थी, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती थी। लेकिन जीएसटी के लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा।
50 फीसदी व्यापार प्रभावित हुआ
व्यापारी नेता उमंग अग्रवाल ने बताया जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा उद्योग में बड़ी कंपनियों ने तो खुद को सेटल कर लिया पर, गांव-शहर के व्यापारियों के लिए दिक्कतें बनी रहीं। इससे उबरने का मौका भी नहीं मिला कि ई-वे बिल आ गया। फिर समस्याएं पैदा हो गईं। जीएसटी लागू होने से पिछले एक साल में 50 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुआ है। उमंग कहते हैं कि जीएसटी पर अब भी भ्रम है। शिक्षा पर सरकार का जोर है पर स्टेशनरी पर अलग-अलग श्रेणियों में जीएसटी है। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। सर्वाधिक समस्याएं ग्रामीण इलाकों में हैं। बड़ी बड़ी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं पर छोटे मैनुफैक्चरर की कमर टूट रही है। बिना तैयारियों के जीएसटी लागू की गई। उमंग अग्रवाल कहते हैं कि जीएसटी लागू होने से व्यापार की गति पर बहुत बड़ा असर डाला है। जीएसटी की व्यवस्था इस एक साल में ही डावां-डोल हो रही है। एक ही प्रोडक्ट में दो सलैब कर चोरी और हाफ बिलिंग को बढ़ावा दे रही है। कर चोरों ने चोरी के नए रास्ते ढूंढ लिए हैं।
रिफंड के करोड़ों रुपए फंसे
जाने-माने कपड़ा कारोबारी रमेश पॉलहवाल कहते हैं कि कपड़े का पूरा कारोबार उधार पर चलता है। कंपनियां व्यापारियों को सामान देकर धीरे-धीरे रुपये वसूली होती हैं। ऐसे में जीएसटी आने से व्यापार प्रभावित होने लगा। करोड़ों रुपये का रिफंड जीएसटी में फंसा है। कपड़े की सेल 30 प्रतिशत रह गई है, जो धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर है। वहीं, कपड़े की बिक्री 50 प्रतिशत घटी है। समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार चाहती क्या है। अब धंधा बदलना पड़ेगा। गुमटी के कपड़ा व्यापारी सरदार रमन सिंह कहते हैं कि जीएसटी के चलते ईद फीकी रही। महज 30 से 40 फीसदी की कपड़ों की बिक्री हुई। जीएसटी में सबसे ज्यादा नुकसान छोटे कारोबारियों को उठाना पड़ा, जबकि उद्योगपतियों की आमदनी बढ़ी है।
कुछ इस तरह बोले ग्राहक
श्रीराम टॉवर में मोबाइल लेने पहुंचे रफीक ने बताया कि जीएसटी लाने का मुख्य उद्देश्य था जनता को चीजें एक दर और कम दामों पर उपलब्ध करना लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कर की दरें कम होने के बाद भी जनता को सभी चीजें उतने ही दामों पर मिल रही हैं और इस पर ध्यान देने की जरूरत है। हजरतगंज में पत्नी के लिए साड़ी लेने पहुंचे अभय सिंह कहते हैं कि जीएसटी लागू करने की रफ्तार बहुत सुस्त है। इस वजह से आम जनता को इसकी राहत नहीं मिल रही। इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की आधी अधूरी तैयारी भी जिम्मेदार है। अब तक के सबसे बड़े कर सुधार के बावजूद व्यापारियों, उद्यमियों, वकीलों और अफसरों ने टैक्स चोरी के रास्ते निकाल लिए हैं।
Published on:
01 Jul 2018 11:33 am
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