
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश अक्सरअपने फैसलों से लोगों को चौकाते रहे हैं। 2017 में पहली बार विधायक बनने वाले राजभर कभी भारतीय जनता पार्टी के साथ रहे तो कभी समाजवादी पार्टी के साथी रहें। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन को मिली हार के बाद जिस प्रकार से उनके और अखलेश के बीच कड़वाहट बढ़ीं वो सभी ने देखा। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों दलों का गठबंधन एक साल भी नहीं चल पाया और गठबंधन टूट गया।
2017 में पहली बार बने विधायक
ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा का 2017 में भारतीय जनता पार्टी यानी BJP के साथ गठबंधन था। वह अपनी 15 साल की राजनीति के बाद पहली बार गाजीपुर के जहूराबाद से विधायक बनें। गठबंधन में BJP ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए 8 सिट दिया था। इसमें से उनकी पार्टी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज किया था। इसके बाद उनको योगी कैबिनेट में पिछड़े वर्ग कल्याण मंत्री बनाए गए। हांलाकि CM योगी से मनमुटाव के कारण उन्होंने डेढ़ साल में ही अपना गठबंधन तोड़ लिया और NDA से अलग हो गए।
2019 के लोकसभा में बिगाड़ा भाजपा का खेल
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन तोड़ने के बाद उन्होंने भाजपा का कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। जिससे BJP को गाजीपुर, मऊ, जौनपुर सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इससे सबक लेते हुए भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में फिर से उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहा। लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया।
उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन किया। पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, बलिया, जौनपुर, बस्ती, कुशीनगर की 18 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत भी दर्ज किया।
विधानसभा चुनाव के बाद से अखिलेश पर साधते रहे निशाना
10 मार्च 2022 को विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही ओमप्रकाश राजभर अखिलेश पर हमलावर हो गए। उन्होंने सपा प्रमुख को नसीहत भी दिया और उन्हें AC कमरों से बाहर निकलकर काम करने के लिए कहा। जून 2022 में ये तल्खी तब और बढ़ गई, जब आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा के उपचुनवाव में सपा को मिली हार के बाद वह अखिलेश यादव को एक खास किस्म के लोगों से घिरे रहने व पार्टी का काम न करने का आरोप लगाया।
राष्ट्रपति चुनाव में NDA को दिया समर्थन
सपा गठबंधन में रहने के दौरान जब राष्ट्रपति के चुनाव में CM योगी ने उनसे समर्थन मांगा। तब उन्होंने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने का ऐलान कर दिया। इससे नाराज होकर अखिलेश यादव ने उन्हें पत्र लिखकर अपना रुख साफ करने या कहीं भी जाने के लिए कहा। सपा प्रमुख के तरफ से पत्र मिलने पर राजभर ने कहा थी कि हमने सपा के साथ गठबंधन निभाया। लेकिन उन्होंने नहीं निभाया, जब उन्होंने हमें गठबंधन से अलग कर ही दिया है तो हमें भी उनका तलाक मंजूर हैं।
पूर्वांचल के कई जिलों में रखते है पहुंच
ओमप्रकाश राजभर पूर्वांचल के कई जिलों खासकर वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, कुशीनगर में अच्छी पकड़ रखते हैं। इस बात का अंदाजा BJP और सपा दोनों को हैं। इसलिए भाजपा अभी से उन्हें अपने पाले में करने के लिए जुट गई है। UP सरकार के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ उन्हें अक्सर विधानसभा और कई जगहों पर एक साथ देखा गया है।
कई मौके पर की CM योगी की तारीफ
सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कई मौके पर CM योगी की तारीफ भी की। विधानसभा सत्र के दौरान जब प्रदेश में रामचरितमानस विवाद जब अपने चरम पर था। तब उनकी पार्टी ने इसे सपा का किया धरा बताय। उन्होंने सपा के जातीगत जनगणना की मांग पर भी निशाना साधा था। रााजभर ने कहा था कि अगर सपा सरकार के रहते उन्होंने जातीगत जनगणना कराया होता तो आज उन्हें इसके लिए बार बार सरकार से कहना नहीं पड़ता।
लोकसभा चुनाव में किस के साथ जाएंगे अभी साफ नहीं
विधानसभा सत्र के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे गठबंधन को लेकर सवाल किया। तब इसके जवाब में उन्होंने कहा था, “अभी से क्या बता दें कि किसके साथ जाएंगे? समय आने पर फैसला करेंगे। हो सकता है कि हम आने वाले चुनाव में अकेले लड़ जाए”।
BJP को होगा फायदा
2024 में अगर राजभर BJP के साथ नहीं भी जाते हैं तो भी BJP को फायदा मिल सकता हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि 2024 में सपा बसपा एक साथ नहीं लड़ेगे। वहीं, 2022 में सपा के 100 पार सीट जीतने में राजभर का हाथ था। लेकिन इस बार वह सपा के साथ नहीं होंगे इस बात का फायदा BJP को पूर्वांचल के कई सीटों पर मिलेगा।
Published on:
21 Mar 2023 06:26 pm
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