
लखनऊ. दुनिया में हर साल मुंह के कैंसर से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। भारत में हर साल ओरल कैंसर के 77 हजार मामले सामने आते हैं जो दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं और इस बीमारी की मृत्युदर भी कहीं अधिक है वहीं, यूपी देश के अन्य राज्यों में सबसे आगे है। ओरल कैंसर को लेकर 25 वर्षों से रिसर्च कर रहे अहमदाबाद के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. भरत अग्रावत ने बताया कि मुंह के कैंसर की बीमारी में ओरल सबम्युकस फाइब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis) जो कैंसर पूर्व स्थिति है, प्रतिवर्ष भारत में इसके 77 हजार मामले पाये जाते हैं। उन्होंने बताया कि, इस बीमारी का विस्तार इतना भयावह है कि प्रति घंटे देश में करीब पांच लोगों की मुंह के कैंसर से दर्दनाक मौत हो जाती है।
डॉ. भरत आग्रावत ने कहा कि ओरल कैंसर दुनिया में सबसे अधिक होने वाला कैंसर है, लेकिन सिर्फ भारत में ही एक तिहाई से अधिक मामले पाए जाते हैं। उन्होंने कहा, भारत में ओरल कैंसर में उच्च मृत्यु दर के कई कारण है, जिनमें प्राथमिक कारण देर से उपचार शुरू होना है। ओरल सबम्युकस फाइब्रोसिस की वजह से मुंह खोलने में परेशानी और देरी से होने वाले उपचार के कारण इसके मरीजों को अत्यधिक पीड़ा के साथ ही शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक मार भी सहनी पड़ती है। आंकड़ों के मुताबिक, देश के अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में कैंसर बढ़ने और इससे होने वाली मौत दोनों राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। सूबे में वर्ष 2016 से लेकर अब तक 4.93 फीसदी की दर से कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जबकि मौत 4.95 फीसदी की दर से बढ़ी है।
डॉ. अग्रावत ने बताया कि ओरल सबम्युकस फिब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis) ऐसा रोग है जो ध्यान में नहीं आता है। उदाहरण के लिए कोलेस्टेरॉल के कारण उच्च रक्त चाप और हृदय रोग व इन्सुलिन की कमी के कारण भी डायबेटीज होता है। इसी तरह ओरल सबम्युकस फिब्रोसिस भी जीवनशैली पर होने वाले परिणामों के कारण कई तरह की समस्याएं पैदा होती है।
मसूड़ों में सूजन और मुंह में अल्सर
डॉ. अग्रावत ने बताया कि 25 साल पहले उन्होंने ओरल सबम्युकस फिब्रोसिस के बारे में रिसर्च शुरू किया। उस दौरान वे अहमदाबाद के सरकारी दंत चिकित्सा महाविद्यालय के छात्र थे और सिविल हॉस्पिटल में पेशेंट देखते थे। उस दौरान ही उन्होंने 'मुंह के कैंसर और प्री- कैंसर' मामले पर नजर रखनी शुरू की। वे वहां पर दंत चिक्तिसा के कई उपशाखाओं में काम करते हुए क्लिनिकल रोटेशनल इंटर्नशिप' इस एक प्रोग्राम के भी हिस्सा रहे। इन कार्यक्रमों के दौरान व हॉस्पिटल में पेशेंट देखते हुए ऐसे कई लोगों से मिलना होता था, जो अपना मुंह ठीक से नहीं खोल पाते थे। उनके मुंह में अल्सर्स और जलने की संवेदना थी। मसूड़े में सूजन होती थी। उन्होंने बताया, गुटखा, सुपारी और पान मसाला के कारण मुंह खुलना कम हो जाता है। संकुचित मुंह के कारण किसी भी तरह का दंत उपचार भी कठिन होता है।
देरी से इलाज पर बिगड़ जाती है स्थिति
उन्होंने अपने अध्यन में पाया कि जबकि, मुंह मनुष्य के आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य का मार्ग है परंतु, ओएसएमएफ (Oral Submucous Fibrosis) में देरी से उपचार के कारण दांत, मसूड़े और मुंह की स्थिति बिगड़ जाती है और ठीक से उपचार का मौका नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया, जब मैं इस रोग के शुरुआती उपचार के विकल्पों को ढूंढता था, तब मुझे पता चला कि इन्जेक्शन्स या फिबरस बंड का शल्य चिकित्सा यही उपलब्ध है और ये दोनों पीड़ादायक और महंगे थे। वह भी सिर्फ दंत चिकित्सालय और हॉस्पिटल्स में ही उपलब्ध थे। इसके बाद उन्होने निर्णय लिया और अपना पेटेंटेड प्राकृतिक नवाचार का एक 'मुंह खोलने’ का किट बनाया जिससे कि मरीज घर पर ही ‘ओरल सबम्युकस फिब्रोसिस’ की स्थिति में स्वयं उपचार कर सकता है। उन्होंने कहा, उम्मीद है अगले 10 वर्षों में यह डिवाइस बाजार में मिलने लगेगा।
Updated on:
26 Feb 2022 06:30 pm
Published on:
26 Feb 2022 06:17 pm
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