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उल्लू मिलेगा, 60 प्रतिशत एडवांस दो और तीन दिन बाद ले जाओ !

3 हज़ार में बिक रहे हैं उल्लू

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लखनऊ

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Dikshant Sharma

Oct 17, 2017

owl sold

owl being sold

लखनऊ. इस दिवाली यूपी पुलिस और वन विभाग के अधिकारी उल्लू ढून्ढ रहे हैं। दरअसल प्रतिबन्ध के बाद भी उल्लू और नीलकंठ धड्ड्ले से बिकते हैं। इसी के चलते पुलिस विभाग और वन विभाग की टीम ये सुनिश्चित कर रही है कि ऐसा न किया जाए। लेकिन पत्रिका पड़ताल में ये दावे फेल होते नज़र आरहे हैं।

पत्रिका को सूत्रों से जानकारी मिली कि नक्खास की चिड़िया बाजार में उल्लू और नीलकंठ मिल रहे हैं। पत्रिका संवादाता वहां पहुंचा। दुकानदार से पुछा कि उल्लू खरीदना है। पहले तो उसने ऊपर से नीचे तक देखा और फिर इधर उधर। दुकानदार धीरे से बोला 'उल्लू नहीं बेचते हैं हम। लेकिन अगर चाहिए तो 3 दिन में मिल जाएगा।'

लीड मिलने के बाद हमने उनसे और जानना चाहा कि उल्लू कितने का है। दुकानदार की ओर से बताया गया कि 3 हज़ार से कम का नहीं पड़ेगा। यही नहीं इसके लिए 60 प्रतिशत रकम एडवांस देना पड़ेगा। उल्लू का रंग पूछने पर उसने कहा कि भूरे चकत्ते वाला ही मिलेगा।

एटीएम से पैसे निकाल कर लाने का बहाना बाना कर हम निकलने लगे तो दुकानदार ने जानना चहा कि आखिर हम उल्लू का करेंगे क्या ? बहरहाल इन सब से बेखबर प्रशासन ये कहता है कि नक्खास में उल्लू और नीलकंठ नहीं मिलते। जबकि वन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि दिवाली से पहले ही रेंजर्स को सचेत कर दिया जाता है कि जंगल के आस पास घूमने वाले संदिग्ध लोगों की धड़ पकड़ की जाए।

अंधविश्वास में दी जाती है बलि
समाज के कुछ अंधविश्वासी लोग अपनी सुख-समृद्धि को बढ़ाने के लिए उल्लुओं की बलि देते हैं। इसके साथ ही कुछ तांत्रिक भी दिवाली में उल्लुओं की हत्या करके अपनी तंत्र साधना करते हैं। लोगों की इस प्रवृत्ति का फायदा उठाने के लिए पक्षियों के शिकारी (बहेलिए) दिवाली नजदीक आते ही जंगलों में सक्रिय हो जाते हैं। जंगलों से इस बेजुबान पक्षी को पकड़कर ऊंचे दामों में बेच देते हैं। अंधविश्वास के चलते इस रात्रिचर पक्षी की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है।


राजधानी के इन क्षेत्रों में पाए जाते हैं उल्लू
राजधानी के वन क्षेत्र में हैं उल्लुओं की कई प्रजातियां बड़े स्तर पर शिकार होने के बावजूद लखनऊ के वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उल्लू प्रवास करते हैं। काकोरी, माल, मलिहाबाद, कुकरैल, बख्शी का तालाब, मोहनलालगंज सहित अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उल्लुओं की कई प्रजातियां मौजूद हैं।