
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Elections 2021) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। अब लोगों को आरक्षण सूची का इंतजार है। इस समय अधिकांश जिलों में प्रशासनिक स्तर पर आरक्षण सूची का काम चल रहा है। जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित है, वह आगामी चुनाव में उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं रहेगी। आरक्षण वरीयता क्रम में एसटी की कुल आरक्षित सीटों में से एक तिहाई एसटी महिला के लिए आरक्षित होंगी। बाकी में महिला या पुरुष दोनों रहेंगे। एससी की 21 प्रतिशत आरक्षित सीटों में एक तिहाई सीटें इस वर्ग की महिला और बाकी बची सीटें इसी वर्ग के महिला या पुरुष दोनों के लिए होंगी।
ऐसे ही ओबीसी की 27 फीसदी सीटों में तिहाई सीटें इस वर्ग की महिला के लिए आरक्षित की जाएंगी। बाकी इस वर्ग की महिला या पुरुष दोनों के लिए अनारक्षित रहेंगी। कुल की 50 प्रतिशत सीटें अनारक्षित होंगी, मगर उनमें एक तिहाई सीटें सामान्य जाति की महिला प्रत्याशियों के लिए आरक्षित रहेंगी। पंचायत चुनाव में सीटों पर आरक्षण अवरोही क्रम में लागू होगा। ग्राम पंचायतों की वर्ष 2011 की जनसंख्या के आंकड़े फीड करा रहे हैं। ब्लॉकों को सीधे लखनऊ से जोड़ा गया है। इस बार पंचायत चुनाव का आरक्षण लखनऊ से ही तय होगा। आरक्षण सूची भी ऑनलाइन जारी होगी। कोई भी घर बैठे पंचायत चुनाव के आरक्षण के बारे में पता कर सकेगा।
कैसे आरक्षित होगी सीट
ग्राम पंचायतों में आरक्षण लागू करने के लिए राजस्व ग्रामों की जनसंख्या का आंकलन किया जाएगा। पांच साल पहले चुनाव के समय ग्राम पंचायत की क्या स्थिति थी, वर्तमान में क्या स्थिति है, उसी आधार पर तय होगा कि उस ग्राम पंचायत की सीट किस प्रत्याशी के लिए आरक्षित होगी। प्रदेश में जो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने हैं। उसमें ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य बीडीसी, वार्ड मेंम्बर, जिला पंचायत सदस्य के लिए अलग-अलग चुनाव प्रक्रिया होगी। गांव-गांव पदों के साथ उनकी संख्या भी निर्वाचन आयोग ने बढ़ाई है। इसमें एक वार्ड से सदस्य के लिए 18 पर्चें भरे जा सकेंगे।
ग्राम प्रधान के लिए 57 लोग भर सकेंगे पर्चा
वहीं बीडीसी के लिए 36 पर्चा, ग्राम प्रधान के लिए 57 और जिला पंचायत सदस्य के लिए 53 लोग पर्चा भर सकेंगे। अधिकारियों से मिल रही जानकारी के अनुसार पिछले चुनावों में यह संख्या 45 से 47 रहती थी, लेकिन इस बार इसे बढ़ाया गया है। पहले प्रत्याशी अधिक होने के कारण कई लोग चुनाव लड़ऩे से वंचित रह जाते थे। अब लोगों का चुनाव लड़ने का मौका खाली न जाएगा। वह भी अपनी दावेदारी कर सकेंगे और आसानी से चुनाव लड़ सकेंगे।
Updated on:
16 Jan 2021 10:44 am
Published on:
16 Jan 2021 10:22 am
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