
सड़क निर्माण में काट दिए जाते हैं उपयोगी पेड़, बदले में लगाए जाते हैं अनुपयोगी पौधे
लखनऊ. पौधारोपण के लिए एक ओर जहां हर साल सरकार और गैर सरकारी संस्थाएं अभियान चलाती हैं तो दूसरी ओर एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि विकास कार्यों के लिए हर साल बड़ी संख्या में पेड़ काट दिए जाते हैं। प्रदेश में पेड़ों को सबके अधिक नुकसान सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के दौरान हुआ है। एनएचएआई की सड़कों के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाते हैं। इन पेड़ों के काटे जाने के एवज में भरपाई के लिए पौधारोपण का नियम है लेकिन कभी उन लक्ष्यों की पूर्ति नहीं की जा सकी। सड़क किनारे जहां कभी पेड़ों की श्रंखलाएं हुआ करती थी, कई जगह पर वीरानी दिखाई देती है।
कैम्पा फंड से होता है पौधारोपण
दरअसल एनएचएआई जब पेड़ काटता है तो उसे वन विभाग से अनुमति लेनी होती है। वन विभाग अनुमति देता है और पेड़ों को काटने के एवज में एनएचएआई भारत सरकार के माध्यम से वन विभाग को धनराशि देता है जिसे कैम्पा फंड कहते हैं। इस फंड को काटे गए पेड़ों के स्थान पर पौधारोपण कर नुकसान की भरपाई करने में उपयोग किया जाता है। वन सांख्यिकी सेवा के निदेशक ज्ञानेंद्र कटियार बताते हैं कि कोई सरकारी संस्था किसी सार्वजानिक उद्द्येश्य के लिए पेड़ काटने की अनुमति मांगती है तो उससे अनुमति के एवज में शुल्क लिया जाता है जिसका उपयोग सम्बंधित स्थान पर पौधारोपण में किया जाता है।
रोपे जाते हैं अनुपयोगी पौधे
पर्यावरण के संरक्षण के लिए काम कर रहे जानकार बताते हैं कि पौधारोपण के नाम पर आमतौर पर सजावटी और विदेशी पौधे रोप दिए जाते हैं जो कम समय में बड़ा आकार ले लेते हैं लेकिन वे किसी भी दृष्टि से पर्यावरण के लिए लाभकारी नहीं होते। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुनील तिवारी कहते कि सड़क निर्माण के दौरान उपयोगी पेड़ काट दिए जाते हैं और उनकी भरपाई के लिए अनुपयोगी पौधे रोप कर लक्ष्य की पूर्ति करने करने की कोशिश होती है। इस बात की निगरानी होनी चाहिए और साथ ही जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए कि काटे गए पेड़ों के स्थान पर ईमानदारी से पौधारोपण कर हरियाली को बरक़रार रखने की कवायद हो।
Published on:
14 Jun 2018 07:02 pm
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