
Historical Judgements By Indian Courts on Rape Case in Sehore and Bhopal News India
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की अदालतों में इस समय 60 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। इन मुदकमों के निस्तारण में कितने वर्ष लगेंगे और इनके निस्तारण के दौरान कितने नए मुकदमे सामने आएंगे, यह अनुमान लगा पाना भी मुश्किल है। जजों की संख्या की कमी होने सहित कई अन्य कारण हैं जो मुकदमों के निस्तारण में बाधा बन रहे हैं। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में न्यायाधीश इस बात पर चिंता जाहिर कर चुके हैं कि मुकदमों के निस्तारण में काफी समय लग रहा है। इसके बावजूद फिलहाल सरकार की ओर से ऐसी कोई ठोस कवायद दिखाई नहीं देती, जिससे मामलों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर कोई उम्मीद जागे।
मुख्य न्यायाधीश जता चुके हैं चिंता
पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित न्यायिक सेवा संघ के एक कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी बी भोसले ने कहा था कि प्रदेश के अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित 60 लाख मुक़दमे न्याय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इसका सफलतापूर्वक सामना करने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक कार्यावधि में वृद्धि, मध्यस्थता आदि के संबंध में लिए गए निर्णयों का न्यायिक अधिकारियों द्वारा अनुपालन जरूरी है। इससे पहले भी कई बार न्यायाधीश लंबित मुकदमों को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।
होते रहे हैं कई तरह के पहल
अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मुकदमे न्यायाधीशों के साथी ही सरकार के लिए भी चिंता का विषय रहे हैं। सरकार समय-समय पर विशेष तरह के पहल कर मुकदमों को निपटाने की कवायद करती रहती है। हालाँकि इन प्रयासों से बहुत अधिक राहत नहीं मिली। लंबित मुकदमों को निस्तारित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले महीने प्रदेश के सभी जनपदों में स्थाई लोक अदालत की शुरुआत की है। इन अदालतों के समन्वय के लिए एडीएम रैंक के अफसर की तैनाती होगी।
सैन्य अदालतों में पर भी मुकदमों का बोझ
सैन्य अदालतों व अन्य न्यायाधिकरणों पर भी मुकदमों का बोझ बढ़ा है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में मुकदमों का बोझ बढ़ने से वादकारों को न्याय मिलने में देरी हो रही है। न्यायाधिकरण के दिल्ली बेंच के अध्यक्ष जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने पिछले दिनों लखनऊ में एक कार्यक्रम के कहा कि मामलों के निस्तारण के लिए बेंचों की संख्या बढ़ाई जाएगी। सैन्य कोर्ट लखनऊ के दौरे पर पहुंचे जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने कहा कि संसाधनों की कमी पूरी की जाएगी और प्राथमिकता के साथ नए सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी।
औसतन हर जज के पास 2500 केस
उत्तर प्रदेश में औसतन एक जज के पास 2513 मुकदमे सुनवाई के लिए है। पूरे देश का आंकड़ा लें तो एक जज के पास 1350 केस सुनवाई के लिए है। उत्तर प्रदेश के कुल मुकदमों के लगभग 13 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जो 10 साल से भी अधिक समय से लंबित है। उत्तर प्रदेश में औसतन एक महीने में 44500 मुकदमों का निस्तारण होता है। इस औसत से उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों को निपटाने में लगभग 10 वर्ष का समय लगेगा जबकि इस दौरान एक भी नया केस दर्ज न हो।
Published on:
16 Mar 2018 02:29 pm
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