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इस बुजुर्ग के जीवन की कहानी जानकर हैरान रह जाएंगे आप, पिछले जन्म की कहानी बताते हैं तो भर आती हैं आंखें

गोमतीनगर के विश्वास खंड के रहने वाले बलबीर सिंह अपने पिछले जन्म की सारी बातें अभी भी याद है जिसकी खूब चर्चा हो रही है।

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लखनऊ

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Neeraj Patel

Nov 22, 2018

pichle janam ki puri kahani

इस बुजुर्ग के जीवन की कहानी जानकर हैरान रह जाएंगे आप, पिछले जन्म की कहानी बताते हैं तो भर आती हैं आंखें

लखनऊ. गोमतीनगर के विश्वास खंड के रहने वाले बलबीर सिंह अपने पिछले जन्म की सारी बातें अभी भी याद है जिसकी खूब चर्चा हो रही है। इसके साथ ही उनकी बेटी अमृता ने जब पाकिस्तान जाकर सारे प्रमाण देखे तो पता चला कि उनके पिता की बताई गई सारी बातें सच साबित हुई। जब उसे विश्वास हुआ कि उसके पिता का दोबार जन्म हुआ है।

रायबरेली में जन्मे बलवीर ने बोलना शुरू किया तो खुद को राय बहादुर सुंदरदास चोपड़ा बताने लगे। इस बीच सरदार करतार सिंह का परिवार डिंगा में एक वैवाहिक समारोह में पहुंचा।

पुनर्जन्म के ऐसे किस्सों पर कई फिल्में भी बनाई जा चुकी हैं। इन किस्सों और फिल्मों का हकीकत से वास्ता हो न हो, लेकिन लखनऊ के बलबीर के पुनर्जन्म का एहसास लोगों को सच साबित होते दिख रहा है। बलबीर के मुताबिक, उनका पिछला जन्म पाकिस्तान में हुआ था। तब वह हिंदू परिवार में जन्मे थे। बलबीर की बताई बातों को परखने के लिए उनकी बेटी अमृता लांबा पाकिस्तान पहुंचीं, तो वहां सारे प्रमाण वैसे ही मिले जैसे उसके पिता ने बताए। अब उनकी बेटी ने इस पर एक किताब भी लिखकर तैयार की है, जिसका विमोचन पिछले दिनों लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल में किया गया था।

पिछले जन्म की याद आई सारी बातें

गोमतीनगर के विश्वास खंड में रहने वाले बलबीर सिंह उप्पल 96 साल के हो चुके हैं, लेकिन उन्हें आज भी पिछले जन्म की सारी बातें हूबहू याद हैं। वह बताते हैं कि पिछले जन्म में विभाजन से पहले वेस्ट पंजाब के डिंगा टाउन में रहते थे। यह हिस्सा विभाजन के बाद पाकिस्तान में चला गया। तब उनका नाम राय बहादुर सुंदरदास चोपड़ा था। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में वह सेना में यूनिफॉर्म और राशन सप्लाई करते थे। बलबीर के जेहन में पहले विश्वयुद्ध की यादें भी ताजा हैं।

मां की गोद से कूद महल की ओर भागे बलवीर

डिंगा रेलवे स्टेशन के सामने राय बहादुर सुंदरदास का महल था। ट्रेन से उतरते ही बलबीर मां की गोद से कूद महल की ओर भागे और भीतर घुस गए। महल के पेचीदे रास्तों से होते हुए कमरे में पहुंच गए, पियानो पहचाना और पिछले जन्म की कई बातें बताने लगे। यह सुन सब हैरत में आ गए, लेकिन महल के मौजूदा मालिक राव साजिद जहांगीर और डिंगा के बड़े-बुजुर्गों ने उनकी कहीं बातों को सही बताया।

बेटे के बिछड़ने के डर से डिंगा जाना छोड़ दिया

करतार सिंह बमुश्किल बलवीर को वापस ला पाए। घबराई मां केसर कौर ने बेटे के बिछड़ने के डर से डिंगा जाना छोड़ दिया, लेकिन बलबीर की बेटी अमृता ने उनके पिछले जन्म के परिवार को ढूंढ निकाला। अमृता ने डिंगा में रहकर ही शोध किया और बलवीर सिंह की जिंदगी पर 425 पेज की 'पास्ट फॉरवर्ड' किताब भी लिखी।