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KGMU के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने अंग प्रत्यारोपण में पूरे किये 20 साल

प्रो. रविकांत ने बताया कि वर्ष 1979 में जब वे सर्जरी के रेजीडेन्ट थे तब प्लास्टिक सर्जरी अपनी चरमसीमा पर आ चुकी थी।

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Rohit Singh

Dec 28, 2016

plastic surgery department

plastic surgery department

लखनऊ।
केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा किये जा रहे अंग
प्रत्यारोपण के 20 वर्ष पूरे हो गए। जिसके उपलक्ष्य में विभाग में एक सीएमई
का आयोजन किया गया। जिसमें अंगों के पुर्नप्रत्योरपण तथा प्रत्यारोपण पर
चर्चा हुई। सीएमई का उदघाटन केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत ने किया।


सीएमई
के दौरान केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत ने बताया कि वर्ष 1979 में जब वे
सर्जरी के रेजीडेन्ट थे तब प्लास्टिक सर्जरी अपनी चरमसीमा पर आ चुकी थी।
इसके बाद ये विभाग वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ. एके सिंह के नेतृत्व में तेजी
से आगे बढ़ा है।


वही प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड डॉ. एके सिंह
ने कहा कि वर्ष 1996 में सर्वप्रथम कटे हाथ का सफलता पूर्वक
पुर्नप्रत्योरपण कर प्लास्टिक सर्जरी विभाग में इसकी नींव रखी गयी थी।
चिकित्सा क्षेत्र में यह बहुत बड़ी उपलब्धि रही। जिसको राज्य एवं राष्ट्रीय
स्तर पर ख्याति मिली।


इस प्रकार की सर्जरी द्वारा न केवल असंभव को
सभंव किया बल्कि केजीएमसी में ऐसी सुविधाओं को उपलब्ध कराया। इस दौरान
अमनदीप हाॅस्पिटल, अमृतसर के विख्यात सर्जन डॉ. रवि कुमार महाजन, गंगा
हॉस्पिटल कोयम्बटूर के डॉ. हरिवेंकट रमणी, अमृता चिकित्सा संस्थान कोच्चि
के डॉ. मोहित शर्मा ने कटे अंगों के पुर्नप्रत्यारोपण पर अपने-अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये।


सभी
जाने-माने चिकित्सकों ने माइक्रोसर्जरी के क्षेत्र में बुरी तरह से
दुर्घटनाओं में ग्रसित अंगों को पुर्नप्रत्यारोपित कर अपने-अपने अनुभवों को
साझा किया।


बता दें कि डॉ. मोहित शर्मा साउथ एशिया में किये गये
प्रथम हैन्ड ट्रान्सप्लांट की टीम के सदस्य थे । उनके दल द्वारा अब तक चार
सफल हैन्ड ट्रान्सप्लांट किये गये हैं जिनके अनुभवों के आधार पर प्लास्टिक
सर्जरी चिकित्सा को उत्तमता के साथ नये आयामों का भी विस्तृत उल्लेख किया।


गंगा
हाॅस्पिटल, कोयम्बटूर से आये डॉ. हरि वेकटरमणी ने कटे अंगों के
पुर्नप्रत्यारोपण में समर्पित टीम भावना का उल्लेख करते हुये बताया कि गंगा
हाॅस्पिटल कटे हुये अंगों के पुर्नप्रत्यारोपण में मानक प्रोटोकॅाल अपनाती
है। इस सन्दर्भ में डॉ. रवि महाजन ने अपने व्याख्यान में डिजिटल
रिइम्प्लांटेशन का वर्णन कर इसकी भविष्य में उपयोगिता बतायी।