
मानसिक स्वास्थ्य पर घातक असर डालता है प्रदूषण, प्रभावित होती है याददाश्त
लखनऊ. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक के बावजूद दिवाली पर जमकर पटाखे फोड़े गए। इस दौरान न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया और न ही मास्क लगाया गया। प्रदेश में दिवाली की धूम रही। लोगों ने हर तरह के डर को भुला कर पटाखे फोड़े। जिला और पुलिस की लापरवाही की वजह से लोगों में पर्यावरण को लेकर कोई चिंता नहीं दिखी। लखनऊ वासियों ने एनजीटी और प्रशासन के आदेश को ताक पर रख कर रात भर जमकर आतिशबाजी की। राजधानी के सभी क्षेत्रों में खूब पटाखे जलाए गए। इससे सूबे की आबोहवा प्रभावित हुई है। सांस के गंभीर मरीजों पर प्रदूषण का घातक असर पड़ता है। प्रदूषण से जहां फेफड़ों को नुकसान हो रहा है तो वहीं भूख और याददाश्त भी प्रभावित हो रही है। अवसाद के लक्षण होने पर मानसिक रूप से असर पड़ रहा है। जुकाम से नाक बंद, सीने में जकड़न, नींद नहीं आना, ये सब लक्षण मनुष्य को चिड़चिड़ा बना रहे हैं। लंबे समय तक ऐसे हालात होने से लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। ऐसी कई शिकायतें लेकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सेहत पर पड़ता है असर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर का कहना है कि जुकाम-खांसी और छाती में जकड़न लगातार रहने से मरीज दिमागी तौर पर परेशान हो जाते हैं। इससे बात-बात पर गुस्सा करना, काम में मन न लगना, खीझना जैसी दिक्कत होने लगती हैं। हालांकि, यह अस्थायी है और सेहत ठीक होने पर लक्षण भी सामान्य होने लगते हैं लेकिन जब तक मनुष्य इससे जूझता है, तब तक व्यवहार में फर्क जरूर आता है।
योग से मिलेगी राहत
इस तरह की परेशानी से बचने के लिए मनोवैज्ञानिक योग को अपनी लाइफस्टाइल में अपनाने की सलाह देते हैं। इससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है। इसके अतिरिक्त ज्यादा पानी पीने की भी सलाह दी जाती है।
Updated on:
15 Nov 2020, 11:37 AM IST
Published on:
15 Nov 2020, 11:37 AM IST
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