
प्रताप सिंह बघेल ने संभाली माध्यमिक शिक्षा की कमान (फोटो सोर्स: भाषा WhatsApp News Group)
Pratap Singh Baghel Education Director meeting : उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग को मंगलवार को नई प्रशासनिक दिशा मिली, जब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रताप सिंह बघेल ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक का कार्यभार औपचारिक रूप से ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ परिचयात्मक बैठक कर शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाने की प्रतिबद्धता जाहिर की। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और वर्तमान कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
बघेल ने अपने पहले ही संबोधन में साफ कर दिया कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करना उनका प्रमुख लक्ष्य रहेगा। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से समन्वय, नवाचार और सकारात्मक सोच के साथ काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बननी चाहिए।
कार्यभार ग्रहण करने के बाद आयोजित बैठक में प्रताप सिंह बघेल ने विभागीय कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा विभाग को भी समय के अनुसार खुद को ढालना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव सीधे विद्यार्थियों तक दिखाई देना चाहिए। इसके लिए जिला स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी योजना की सफलता तभी मानी जाएगी, जब उसका लाभ अंतिम छात्र तक पहुंचे।
नई शिक्षा नीति और बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए बघेल ने डिजिटल शिक्षा और तकनीक आधारित शिक्षण प्रणाली को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय तकनीकी शिक्षा का है और विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ना अब आवश्यकता बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और तकनीकी संसाधनों को और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उनका मानना है कि यदि छात्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाई कराई जाए, तो उनकी सीखने की क्षमता और रुचि दोनों बढ़ती हैं। बघेल ने यह भी कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल शिक्षा के अंतर को कम करना विभाग की प्राथमिकता होगी। इसके लिए ऐसे प्रयास किए जाएंगे, जिससे दूरदराज के विद्यालयों तक भी तकनीकी सुविधाएं पहुंच सकें।
बैठक के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। छात्रों को ऐसी शिक्षा देना जरूरी है, जिससे वे भविष्य में रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को माध्यमिक स्तर पर और मजबूत बनाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी मिल सकेगी। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि छात्रों को जीवन के लिए तैयार करना होना चाहिए।
बघेल ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी अपने कार्यों के प्रति उत्तरदायी रहें और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और समयबद्ध कार्य संस्कृति विकसित करना जरूरी है। इसके लिए अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और फीडबैक की प्रक्रिया को मजबूत करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल सरकारी आदेशों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
अपने संबोधन में बघेल ने विभागीय समन्वय और टीम भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि सभी अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर काम करें, तो विभाग बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए विचार और नवाचार भी प्रस्तुत करें। उनका मानना है कि सकारात्मक सोच और सहयोग से किसी भी चुनौती का समाधान निकाला जा सकता है। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने भी विभाग की वर्तमान योजनाओं और चुनौतियों से संबंधित जानकारी साझा की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने कहा कि विद्यालयों का वातावरण छात्रों के मानसिक और शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए विद्यालयों में सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
प्रताप सिंह बघेल के कार्यभार संभालने के बाद शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा और बदलाव की उम्मीद दिखाई दे रही है। जिस प्रकार उन्होंने अपने पहले ही संबोधन में तकनीक, पारदर्शिता, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है, उससे यह संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में माध्यमिक शिक्षा विभाग में कई महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिल सकते हैं।
प्रदेश में लाखों छात्र-छात्राएं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हैं। ऐसे में विभाग की नीतियों और योजनाओं का सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। यही वजह है कि शिक्षा जगत की नजर अब नए निदेशक के नेतृत्व में होने वाले बदलावों पर टिकी हुई है। शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है। ऐसे में यदि तकनीक, गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाता है, तो इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक मिलेगा।
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Published on:
02 Jun 2026 03:37 pm
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