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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे ने बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति को रिसीव करने के लिए मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के न पहुंचने और कार्यक्रम स्थल के चयन को लेकर उठे सवालों ने अब राष्ट्रपति के राजनीतिकरण की बहस छेड़ दी है। इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रपति के अपमान पर नाराजगी जताई है।
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। मायावती ने पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इसका राजनीतिकरण करना उचित नहीं है। उन्होंने लिखा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से भी आती हैं। उनके प्रोटोकॉल का पालन करना सभी का दायित्व है। बंगाल में जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मायावती ने संसद और लोकसभा अध्यक्ष के पद को लेकर हो रही राजनीति पर भी चिंता जताई। उन्होंने लिखा पिछले कुछ समय से संसद में भी खासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए। इसी क्रम में कल से शुरू हो रहा संसद का सत्र देश और जनहित में सुचारु रूप से चले, यही आम जनता की अपेक्षा और समय की मांग है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सिलीगुड़ी के फांसीदेवा में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचीं। वहां उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि उन्हें रिसीव करने के लिए राज्य सरकार का कोई बड़ा प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल के छोटे होने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा जब पास में ही विधाननगर जैसा बड़ा मैदान उपलब्ध था, तो इतने छोटे स्थान पर कार्यक्रम क्यों रखा गया? ऐसा लगता है जैसे मुझे बुलाकर जल्द वापस भेजने की व्यवस्था की गई हो। हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताते हुए कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई शिकायत नहीं है लेकिन व्यवस्थाएं बेहतर हो सकती थीं।
राष्ट्रपति के बयानों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कोलकाता में एक धरने के दौरान ममता ने कहा मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को बीजेपी ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भेजा है। वे बीजेपी की राजनीति में फंस गई हैं। ममता ने कहा कि राज्य सरकार इस कॉन्फ्रेंस की आयोजक नहीं थी और उन्हें फंडिंग या आयोजकों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे थे तब राष्ट्रपति ने अपनी आवाज क्यों नहीं उठाई?
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से पहले बंगाल को बांटने और यहां राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि वह लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं और चुनाव के समय हर कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए मुमकिन नहीं है। ममता ने यह भी कहा कि बंगाल चुनाव के बाद उनका अगला लक्ष्य दिल्ली होगा और वह जल्द ही 'एपस्टीन फाइल' का खुलासा कर बीजेपी की सच्चाई सामने लाएंगी।
Published on:
08 Mar 2026 12:26 pm
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