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गरीबी और बेरोजगारी से परेशान व्यक्ति ने सुसाइड नोट में बयां किया अपना दर्द, प्रियंका ने कहा शायद गाजे बाजे के साथ पीएम तक न पहुंचे पत्र

- गरीबी और बेरोजगारी से परेशान व्यक्ति ने किया सुसाइड - सुसाइड नोट में लिखा लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा, नौकरी कहीं मिल नहीं रही इसलिए सुसाइड कर रहा हूं - इस सुसाइड नोट पर कांग्रेस महासचिव ने सरकार पर बोला हमला

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गरीबी और बेरोजगारी से परेशान व्यक्ति ने सुसाइड नोट में बयां किया अपना दर्द, प्रियंका ने कहा शायद गाजे बाजे के साथ पीएम तक न पहुंचे पत्र

गरीबी और बेरोजगारी से परेशान व्यक्ति ने सुसाइड नोट में बयां किया अपना दर्द, प्रियंका ने कहा शायद गाजे बाजे के साथ पीएम तक न पहुंचे पत्र

लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के दूसरे कार्यकाल का आज एक साल पूरा कर रहे हैं। इस उपलब्धि पर पीएम मोदी ने देशवासियों के नाम चिट्ठी लिख कर उनका आभार व्यक्त किया और आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी के एक साल के कार्यकाल पूरा करने पर भाजपा के तमाम नेताओं ने उन्हें बधाई दी। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें एक पत्र पढ़ने की अपील की है। ये पत्र उस व्यक्ति का है जिसनें लॉकडाउन में आर्थिक तंगी की मार से परेशान होकर खुदखुशी कर ली। जान देने से पहले व्यक्ति ने सुसाइड नोट लिखा जिसमें उसने आत्महत्या का कारण और मजबूरी का जिक्र किया है।

'मैं गरीबी और बेरोजगारी से कर रहा हूं सुसाइड'

29 मई को लखीमपुर जिले के मैगलगंज कस्बे में रेलवे लाइन पर एक कटा शव मिला। ट्रेन की पटरी पर मिले शव की पहचान मैगलगंज की नई बस्ती निवासी भानु प्रकाश गुप्ता के रुप में हुई। मरने से पहले भानु प्रकाश ने एक सुसाइड नोट लिखा था जिसमें उसने पैसों की कमी के चलते अपना घर चलाने में हो रही परेशानी का जिक्र किया था। पत्र में लिखा था, ''मैं यह सुसाइड गरीबी और बेरोजगारी की वजह से कर रहा हूं। गेहूं चावल सरकारी कोटे से मिलता है पर चीनी, पत्ती, दूध, दाल, सब्जी, मिर्च, मसाले परचून वाला अब उधार नहीं देता। लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा है। नौकरी कहीं नहीं मिल रही।"

भानु गुप्ता लखीमपुर के पड़ोसी जिले शाहजहांपुर में एक होटल पर खाना बनाने का काम करते थे। लेकिन लॉकाडाउन के बाद होटल बंद हो गया और भानु बेरोजगार हो गए। मृतक के भाई सौरभ गुप्ता ने बताया कि भानु प्रताप सांस की बीमारी से ग्रसित थे। लॉकडाउन में कामधंधा बंद होने के चलते परेशान थे। एक तो नौकरी नहीं उपर से बीमारी अलग। घर चलाने को पैसे भी नहीं बचे थे। इन सबसे परेशान होकर उन्होंने अपनी जान दे दी। सौरभ गुप्ता ने बताया कि भानु प्रताप के आत्महत्या की जानकारी पहले किसी को नहीं थी।

भानु गुप्ता का शव शुक्रवार 29 मई की शाम को तीन से 4 बजे के बीच शाहजहांपुर- सीतापुर रेलवे ट्रैक पर मिला। घर वालों के मुताबिक सीतापुर की तरफ से आ रही श्रमिक ट्रेन से कटकर उन्होंने जान दी है। भानु गुप्ता के परिवार में 3 छोटे बेटे और 2 बेटियां हैं। जिनमें से बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। दूसरी की शादी की खोज कर रहे थे। सौरभ गुप्ता बताते हैं, उनका मां विधवा हैं, उन्हें पेंशन मिलती है। उसी से काम चल रहा होगा। बाकी उधार-व्यवहार मांग कर काम चला रहे थे।

शासन प्रशासन से भी कोई सहयोग नहीं

भानु गुप्ता ने अपने सुसाइड नोट में भी लिखा है कि सरकार की तरफ से उन्हें राशन मिल रहा था। लेकिन बाकी सामान खरीदने के लिए दुकानदार ने उधार देने से मना कर दिया था। सुसाइड नोट में भानु गुप्ता ने आगे लिखा.. "मुझे खांसी, सांस जोड़ों का दर्द, दौरा और अत्यधिक कमजोरी, चलना दूभर, चक्कर आदि हैं। मेरी विधवा मां भी दो साल से खांसी बुखार से पीड़ित हैं। तड़प-तड़प कर जी रहे हैं। लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा है। नौकरी कहीं मिल नहीं रही है, जो काम हो की खर्चा चलाएं व इलाज कराएं। हमें न कोई शासन का सहयोग मिला है।

प्रियंका गांधी ने बोला सरकार पर हमला

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस घटना को लेकर केंद्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार पर प्रहार किया है। प्रियंका ने कहा, एक दुखद घटना में यूपी के भानु गुप्ता ने ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या कर ली। काम बंद हो चुका था। इस शख्स को अपना और माता जी का इलाज कराना था। सरकार से केवल राशन मिला था लेकिन इनका पत्र कहता है और भी चीजें तो खरीदनी पड़ती हैं। और भी जरूरतें होती हैं। ये पत्र शायद आज एक साल के जश्न वाले पत्र की तरह ‘गाजे बाजे के साथ’ आपके पास न पहुंचे। लेकिन इसको पढ़िए जरूर। हिन्दुस्तान में बहुत सारे लोग आज इसी तरह कष्ट में हैं।'

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