उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर
में भारतीय नागरिेकों की समस्याओं के बारे में समझने की आवश्यकता है। यहाँ के नागरिकों को आज तक मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है और इन्हें
जम्मू-कश्मीर में एक भिन्न झंडे के अन्तर्गत रखा गया है। इस तथ्य के बावजूद
कि कश्मीरी मुस्लिम नेतृत्व ने 1946 में मोहम्मद अल्ली जिन्ना को कश्मीर
में एक बैठक नहीं करने दी थी। इसके बावजूद भी महाराजा हरि सिंह ने 26
अक्टूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर को भारत संघ में शामिल होने के लिए विलयपत्र
पर 575 रियासतों की तरह हस्ताक्षर किये थे।