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संसद ने नहीं किया कश्मीर के विलय पर विचार, पिलेट गन का प्रयोग दुखद

प्रो. भीम सिंह ने लखनऊ में आयोजित राजस्थान पत्रिका के की-नोट 2016 कार्यक्रम में आयोजित 'कश्मीर से कन्याकुमारी' सत्र के दौरान कही।

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Rohit Singh

Nov 15, 2016

Patrika Key note 2016

Patrika Key note 2016

लखनऊ।
कश्मीर से कन्याकुमारी और इम्फाल (मणिपुर) से द्वारका (गुजरात) तक एक

संविधान और एक राष्ट्रीय ध्वज होना चाहिए। जिससे जम्मू-कश्मीर में भारतीय
नागरिक अपने मौलिक अधिकारों से वंचित न रह सकें। वर्तमान में जम्मू कश्मीर
में भारतीय संविधान लागू नहीं है। क्योंकि भारतीय संसद ने इसके लिए न कभी
प्रयास किया और न ही विचार किया। ये बात नेशनल पैंथर्स पार्टी के संस्थापक
और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रो. भीम सिंह ने लखनऊ में आयोजित
राजस्थान पत्रिका के की-नोट 2016 कार्यक्रम में आयोजित 'कश्मीर से
कन्याकुमारी' सत्र के दौरान कही।


उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर
में भारतीय नागरिेकों की समस्याओं के बारे में समझने की आवश्यकता है। यहाँ के नागरिकों को आज तक मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है और इन्हें
जम्मू-कश्मीर में एक भिन्न झंडे के अन्तर्गत रखा गया है। इस तथ्य के बावजूद
कि कश्मीरी मुस्लिम नेतृत्व ने 1946 में मोहम्मद अल्ली जिन्ना को कश्मीर
में एक बैठक नहीं करने दी थी। इसके बावजूद भी महाराजा हरि सिंह ने 26
अक्टूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर को भारत संघ में शामिल होने के लिए विलयपत्र
पर 575 रियासतों की तरह हस्ताक्षर किये थे।


प्रो. भीमसिंह ने खेद
प्रकट करते हुए कहा कि महाराजा हरि सिंह की ओर से जम्मू-कश्मीर के विलय पर
भारतीय संसद ने आज तक न विचार किया है और न ही समर्थन किया है। इसके अलावा
संसद की ओर से अपने कर्त्तव्य को भी नहीं निभाया गया है।


प्रो.
भीमसिंह ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को सबसे धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और
राष्ट्र एकता के स्तम्भ बताया। उन्होंने जनसुरक्षा कानून के अन्तर्गत
कश्मीर में लगभग 5000 छात्रों व अन्य लोगों पर पिलेट गन से चलाने पर खेद
प्रकट किया।


उन्होंने कहा कि पिलेट गन का प्रयोग विश्व में किसी
प्रजातांत्रिक राष्ट्र में किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने
जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों को भारतीय संविधान से अलग रखने के लिए भारतीय
संसद को दोषी ठहराया। जो जम्मू-कश्मीर के भारतीय नागरिकों को मौलिक
अधिकारों से वंचित करता है।


बता दें कि 1950 में जब भारतीय संविधान लागू हुआ तभी से प्रो. भीम सिंह ने
भारतीय संसद से धारा 370 में शीघ्र संशोधन करके कन्याकुमारी से कश्मीर और
इम्फाल से द्वारका तक एक संविधान सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। जिससे
पूरे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक ध्वज (तिरंगा) फहराया जा सके।