
लखनऊ. एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने लखनऊ पहुंचे वैज्ञानिक सी.एल.खेत्रपाल ने कहा कि एमआरआई का मतलब चुम्बकीय अनुनाद प्रतिबिम्बन (Magnetic resonance imaging ) या नाभिकीय चुम्बकीय अनुनाद प्रतिबिम्बन (NMRI) है जो कि चिकित्सा प्रतिबिम्बन की एक तकनीक है। एम आर आई द्वारा शरीर के अंगों का चित्र प्राप्त करने के लिये प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र तथा रेडियो तरंगों का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सोशल सांइस के क्षेत्र में इसके प्रयोग और उपयोग का प्रभाव लगातार बढता जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब हमारे देश के चिकित्सक किसी गंभीर बिमारी के बारे में पूरी तरह से पता लगाने में सक्षम नहीं थे पर आज एम.आर.आई. के आ जाने के बाद चिकित्सकों को बीमारी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हो जाती है जिससे मरीजों का बेहतर इलाज संभव है।
उन्होंने कहा कि आज ऐसी एम.आर.आई. मशीनें आ गयी हैं जो पल भर में ही हमारे पूरे शरीर के सभी अंगों की सही स्थिति को बता देते हैं जिससे डाक्टर व मरीज दोनों को इलाज करने और कराने में स्वास्थ्य लाभ होता है। खेत्रपाल ने योगा व ओम के बारे मेें छात्र-छात्राओं को विस्तृत जानकारी दी और इनका एम.आर.आई. के द्वारा होने वाले उपयोगों के बारे में बताया। इसके साथ ही खेत्रपाल ने इस क्षेत्र जुड़े कई तकनीकियों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को चित्र के माध्यम से अपने शोधों को साझा किया और कहा कि आप भी इन विषयों से कुछ सीख सकते हैं और आगे शोध कर सकते हैं।
इसके साथ ही एमआरआई के उपयोगोें के बारे में बताते हुए कहा कि विशेषकर मस्तिष्क, मांसपेशियों, दिल और कैंसर के रोगियों को कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) या एक्स-रे जैसे एमआरआई तकनीक के जरिए जांच की सलाह दी जाती है। सीटी स्कैन या पारंपरिक एक्स-रे की भांति एमआरआई आयोनाइजिंग रेडियेशन का इस्तेमाल नहीं करता। इसलिए मरीज को एम.आर.आई. करवाना पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि एम.आर.आई. में शरीर के हरेक अंग की इमेज तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाता है। मस्तिष्क, मांसपेशियां, कनेक्टिव टिश्यू, चेस्ट स्कैन और ज्यादातर ट्यूमर से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने के लिए एमआरआई जांच करवाने की सलाह दी जाती है। मरीजों को एंकल में मोच आने या बैक पेन होने पर भी इसकी सलाह दी जाती है।
उन्होंने इस मशीन के काम करने के बारे में बताते हुए कहा कि मानव शरीर के अंदर पानी की मात्र सबसे ज्यादा होती है। हर वाटर मॉलिक्यूल दो हाइड्रोजन न्यूक्लियाई या प्रोटोन से तैयार होता है। जब भी कोई व्यक्ति स्कैनर के पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड तक पहुंचता है तो इनमें से कुछ प्रोटोन के मैग्नेटिक मोमेंट्स बदल जाते हैं और फील्ड के साथ हो जाते हैं और साथ ही इसकी बनावट के बारे में कहा कि एमआरआई मशीन एक लंबे ट्यूब की भांति नजर आती है जिसके सर्कुलर भाग में एक बड़ा सा चुंबक लगा रहता है। एमआरआई के दौरान मरीज को टेबल पर लिटाकर एमआरआई स्थान पर ले जाता जाता है। जिस अंग का एमआरआई करवाना होता है, टेक्नीशियंस उस खास अंग पर क्वाइल लपेट देते हैं। क्वाइल इस मशीन का ही एक हिस्सा होता है जो कि एमआर सिग्नल पकड़ता है।
शोध निदेशक डाॅ रविकांत ने कहा इस व्याख्यान को लेकर आभार व्यक्त किया। आर्यकुल ग्रुप ऑफ़ कालेज बिजनौर में प्रो.सी.एल.खेत्रपाल का व्याख्यान सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ कालेज के प्रबंध निदेशक सशक्त सिंह, कालेज के संस्थापक के.जी.सिंह व मुख्य वक्ता वैज्ञानिक प्रो.सी.एल.खेत्रपाल ने दीप प्रज्जवलित करके किया। कार्यक्रम में कालेज के प्राचार्य डी.एम.त्रिपाठी, कालेज के रजिस्ट्रार सुदेश तिवारी, शिवभद्रा सिंह, डॉक्टर संजय यादव, अंकिता अग्रवाल, डॉक्टर आदित्य सिंह, डॉक्टर स्तुति वर्मा, डॉक्टर शशांक तिवारी, डॉक्टर नवनीत, बी.के.सिंह, प्रियंका केसरवानी, रश्मि सागर, निधि कुमारी, स्वाती सिंह, संचालिका मिश्रा, आशुतोष यादव, आकांक्षा सिंह, विनीता दूबे, सिद्धार्थ महन्ता, अब्दुल रब खान, सिद्धार्थ राजेन्द्र, शशांक मेहरोत्रा, एस.सी.तिवारी, रवि पाठक, गीता मिश्रा, नीलम भास्कर, धनेश प्रताप सिंह, प्रणव पाण्डेय, पंकज यादव, हर्ष नारायण सिंह, रोहित वर्मा, सर्वजीत, कौशल, नेहा वर्मा व अन्य लोग मौजूद रहे।
Published on:
04 Feb 2018 11:21 am
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