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Lucknow School Guidelines: डीएम का बड़ा एक्शन: निजी स्कूलों की मनमानी खत्म, फीस और यूनिफॉर्म पर सख्ती

Lucknow DM Cracks Down on Private Schools: लखनऊ में डीएम ने निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन लेते हुए फीस, यूनिफॉर्म और किताबों पर सख्त नियम लागू किए, जिससे अभिभावकों को राहत मिली है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Apr 10, 2026

फीस की मनमानी पर सख्ती, अभिभावकों को बड़ी राहत (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

फीस की मनमानी पर सख्ती, अभिभावकों को बड़ी राहत (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

DM Action Private Schools: राजधानी लखनऊ में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली और अन्य अनियमितताओं पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी (डीएम) के निर्देश पर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसले लागू किए गए हैं। इन आदेशों के बाद निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है, वहीं अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

मनमानी फीस वसूली पर सख्त रोक

डीएम द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब कोई भी निजी स्कूल निर्धारित शुल्क से एक पैसा भी अधिक नहीं वसूल सकेगा। यदि कोई स्कूल ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फीस का निर्धारण शासन द्वारा तय मानकों के अनुसार ही होगा और इसमें किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कैपिटेशन फीस पर पूरी तरह प्रतिबंध

सबसे अहम निर्णयों में से एक कैपिटेशन फीस (डोनेशन) पर पूर्ण प्रतिबंध है। अक्सर अभिभावकों से एडमिशन के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूली जाती थी, जिसे अब पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया गया है। डीएम ने साफ कहा है कि यदि कोई स्कूल इस तरह की वसूली करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हर शुल्क की रसीद देना अनिवार्य

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि स्कूल द्वारा ली जाने वाली हर फीस की विधिवत रसीद अभिभावकों को दी जाए। बिना रसीद के किसी भी प्रकार का भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे अभिभावकों को अपने भुगतान का स्पष्ट रिकॉर्ड मिलेगा और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव पर रोक

अक्सर देखा जाता है कि निजी स्कूल हर साल यूनिफॉर्म में बदलाव कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हैं। इस पर रोक लगाते हुए डीएम ने निर्देश दिया है कि किसी भी स्कूल की यूनिफॉर्म कम से कम पांच वर्षों तक नहीं बदली जाएगी। इससे अभिभावकों को बार-बार नई यूनिफॉर्म खरीदने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

NCERT किताबों को अनिवार्यता

शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने के लिए यह भी आदेश दिया गया है कि जो स्कूल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से संचालित हैं, वहां केवल NCERT की किताबें ही लागू होंगी। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इससे शिक्षा की लागत में कमी आएगी और सभी छात्रों को समान गुणवत्ता की पढ़ाई उपलब्ध हो सकेगी।

शिकायत के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। एडीएम ज्योति गौतम और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अभिभावक अब सीधे इन अधिकारियों से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि हर शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

स्कूलों में मचा हड़कंप

इन सख्त निर्देशों के बाद शहर के निजी स्कूलों में हड़कंप की स्थिति है। कई स्कूलों ने अपनी फीस संरचना और अन्य नियमों की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन कर सकें। कुछ स्कूलों ने अभिभावकों को पहले ही सूचित करना शुरू कर दिया है कि वे नई गाइडलाइंस के अनुसार काम करेंगे।

अभिभावकों में खुशी की लहर

डीएम के इस फैसले का अभिभावकों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी से वे परेशान थे। हर साल बढ़ती फीस, महंगी किताबें और बार-बार बदलती यूनिफॉर्म उनके बजट पर भारी पड़ती थीं। अब प्रशासन के इस कदम से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि इन नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाता है, तो यह पूरे राज्य के लिए एक मॉडल बन सकता है।

प्रशासन की सख्ती जारी रहेगी

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान एक बार का नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।