
PC: IANS
दिल्ली विधानसभा में आयोजित अखिल भारतीय स्पीकर सम्मेलन के दूसरे दिन अपने उद्बोधन में महाना ने कहा कि जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों को स्वयं निभानी होती है, कोई दूसरा इसे पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने इस तरह के सम्मेलनों को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे आदर्श, साहस, ऊर्जा और समर्पण की प्रेरणा मिलती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
महाना ने कहा कि भारत सिर्फ भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विचार और चेतना है, जिसने मानव समाज को शासन, न्याय और सामाजिक समरसता के सर्वोच्च आदर्श दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में केवल राजतंत्र और जनजातीय शासन प्रचलित था, तब भारत में सामाजिक विमर्श और संवाद की परंपरा विकसित हो चुकी थी। यही कारण है कि भारत को लोकतंत्र की जननी माना जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, पर यह देश रहना चाहिए। महाना ने कहा कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत और जाग्रत राष्ट्र है।
यह सम्मेलन केंद्रीय विधानसभा के प्रथम भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल के निर्वाचन की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। उद्घाटन 24 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया, जबकि समापन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संबोधन से हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश की 29 विधानसभाओं के अध्यक्ष, छह विधान परिषदों के सभापति एवं उपसभापति, राज्यसभा के सभापति और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्य उपस्थित रहे।
सम्मेलन के दौरान चार विषयगत सत्र आयोजित हुए। इनमें प्रारंभिक सत्र 'विट्ठलभाई पटेल: भारत के संविधान और विधायी संस्थाओं को आकार देने में उनकी भूमिका' विषय पर था, जिसे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने संबोधित किया। इसके बाद राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण ने 'भारत: लोकतंत्र की जननी' विषय पर मुख्य सत्र को संबोधित किया।
Published on:
25 Aug 2025 11:38 pm

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