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समाजवादी पार्टी इसी हफ्ते देगी अखिलेश को एक और ‘झटका’ !

वही अटकलें तेज़ हो गयी हैं जिनका सीएम अखिलेश विरोध कर रहे थे।

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Dikshant Sharma

Sep 29, 2016

akhilesh yadav

akhilesh yadav

लखनऊ।
शिवपाल यादव के प्रदेश अध्यक्ष एक बार फिर वही अटकलें तेज़ हो गयी हैं जिनका सीएम अखिलेश विरोध कर रहे थे। समाजवादी पार्टी में माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल (कौएद) के विलय की संभावनाएं झलकने लगी हैं। चर्चाएं हैं कि शिवपाल के विलय पर सहमति देने के बाद से इस हफ्ते में ही इस विलय की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि ये घोषणा सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव कर सकते हैं। चर्चा ये भी हैं कि अखिलेश के विरोध के चलते मुख्तार अंसारी को छोड़कर बाकी पार्टी का सपा में विलय लगभग तय कर लिया गया है।




आपको बतादें बीती जून में कौमी एकता दल का सपा में विलय की घोषणा शिवपाल यादव ने की थी पर सीएम अखिलेश यादव की नाराजगी और विरोध के चलते इसे रद कर दिया गया।


कहा जा रहा था कि इस विलय के पीछे मंत्री बलराम यादव का हाथ है। इसी के चलते सीएम ने उन्हें बर्खास्त भी कर दिया था। हालांकि बाद में बलराम यादव की मंत्रिमंडल में वापसी हो गयी पर कौमी एकता दल और सपा के विलय पर फैसला नहीं हुआ।


अपनी घोषणा के रद्द होने से मंत्री शिवपाल यादव नाराज थे जिससे परिवार का झगड़ा और बढ़ा। लेकिन स्थिति अब अलग है। इस समय फैसला प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के हाथ है। जानकार मानते हैं कि इससे पहले कौएद का विलय सपा सुप्रीमो की सहमति से ही हुआ था।


इस विलय से क्या होगा सपा को फ़ायदा
-कौएद का पूर्वांचल के लगभग 25 जिलों में मुस्लिमों के साथ कुछ अन्य जातियों में भी मजबूत पकड़ है।

- 2012 के लोकसभा चुनावों की बात कर तो कौएद और भारतीय समाज पार्टी ने मिलकर 44 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 22 जिलों में उन्हें 20-50 हजार वोट मिले थे।

-मौजूदा समय में विधानसभा चुनावों को देखते हुए 15 छोटे दल मुस्लिम फ्रंट बना रहे हैं। इससे मुस्लिम वोटों में सेंध लगेगी।


बताते चलें कि राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक अक्टूबर में होगी। अभी तारीख तय नहीं है। पारिवारिक विवाद के बाद यह पहली बैठक होगी जिसमें अमर सिंह से लेकर शिवपाल यादव और प्रो़ राम गोपाल यादव शामिल होंगे।

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